छपरा में शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा में वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर, नगरा के प्रखंड लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटर की भूमिका जांच के घेरे में
छपरा, 14 अक्टूबर 2026। सारण जिला शिक्षा विभाग में शिक्षकों के वेतन भुगतान के सत्यापन के दौरान सरकारी राशि के कथित गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में शिक्षकों के नाम, यूएएन (UAN) संख्या और बैंक खातों के विवरण के कथित दुरुपयोग से सरकारी राशि के अंतरण की बात सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), सारण ने खैरा थानाध्यक्ष को पत्र भेजकर संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
विभागीय पत्र के अनुसार, नगरा प्रखंड में कार्यरत प्रखंड लेखापाल-सह-डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा शिक्षकों के वेतन विपत्र तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया में कथित अनियमितता बरती गई। जांच के दौरान कुछ शिक्षकों के नाम, यूएएन संख्या तथा बैंक खाते के विवरण का अनुचित इस्तेमाल कर वेतन एवं अन्य मदों में सरकारी राशि अंतरित कराए जाने की आशंका सामने आई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: सारण में शिक्षकों के वेतन भुगतान में वित्तीय अनियमितता का मामला, ₹8.84 लाख के कथित गबन को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराने की पहल।
तीन बैंक खातों में लाखों के अंतरण का उल्लेख
जांच से संबंधित पत्र में तीन बैंक खातों में राशि के अंतरण का विवरण दिया गया है। इसके अनुसार, श्री आलोक प्रसाद के बैंक खाते में जनवरी 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच 5,77,869.50 रुपये, श्री सौरभ कुमार के खाते में 1,04,958 रुपये तथा श्रीमती मनोरमा कुमारी के खाते में 2,01,415 रुपये के अंतरण का उल्लेख है। विभागीय जांच में संबंधित शिक्षकों के नाम, यूएएन और बैंक खातों के विवरण में विसंगतियों के साथ वेतन विपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में अनियमितताओं की ओर भी संकेत किया गया है।
बैंक स्टेटमेंट और वेतन विपत्र बने जांच का आधार
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने बैंक स्टेटमेंट, वेतन भुगतान विपत्र और यूएएन अभिलेखों के आधार पर मामले की जांच कराई। पत्र में कुल 8,84,242.50 रुपये की सरकारी राशि के कथित गबन का उल्लेख करते हुए संबंधित कर्मियों एवं अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और विधिसम्मत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
मामले से संबंधित बैंक स्टेटमेंट, भुगतान विपत्र और यूएएन अभिलेख भी पत्र के साथ संलग्न किए गए हैं। अब पुलिस जांच के जरिए यह स्पष्ट होगा कि राशि के अंतरण में किन लोगों की क्या भूमिका रही और वित्तीय अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल, उपलब्ध विवरण विभागीय पत्र में दर्ज आरोपों और जांच के निष्कर्षों पर आधारित हैं; संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच एवं आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।



