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नेहा सिंह राठौर को बदनाम करने की कोशिश पर बिहार इप्टा का कड़ा विरोध, जवाबदेही तय करने की मांग

लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने, सवाल उठाने और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के अधिकार की रक्षा करना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। सार्वजनिक विमर्श को तथ्यपरक, मर्यादित और जवाबदेह बनाए रखना भी मीडिया का महत्वपूर्ण दायित्व है। आज सवाल उठाने वाले व्यक्तियों और संगठनों को तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर जवाब देने के बजाय व्यक्तिगत आरोपों, अपमानजनक टिप्पणियों और सनसनीखेज खबरों के माध्यम से निशाना बनाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। ऐसी प्रवृत्तियां न केवल संबंधित व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं, बल्कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनविश्वास को भी कमजोर करती हैं।

पटना। जानी-मानी लोकगायिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता नेहा सिंह राठौर के संबंध में एक डिजिटल चैनल द्वारा कथित तौर पर भ्रामक, अपमानजनक एवं उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाली खबर प्रसारित किए जाने की बिहार इप्टा राज्य परिषद् ने कड़े शब्दों में निंदा की है। इप्टा ने इसे पत्रकारिता की जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए नेहा सिंह राठौर के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की है।

बिहार इप्टा राज्य परिषद् ने अपने बयान में कहा कि नेहा सिंह राठौर अपने गीतों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से जनता के सवालों और जन-सरोकारों को मुखरता से उठाती रही हैं। ऐसे में, तथ्यों की समुचित जांच-पड़ताल किए बिना उनके संबंध में चरित्रहनन की प्रकृति वाली सामग्री का प्रसारण पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

परिषद् ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने, सवाल उठाने और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के अधिकार की रक्षा करना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। सार्वजनिक विमर्श को तथ्यपरक, मर्यादित और जवाबदेह बनाए रखना भी मीडिया का महत्वपूर्ण दायित्व है। आज सवाल उठाने वाले व्यक्तियों और संगठनों को तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर जवाब देने के बजाय व्यक्तिगत आरोपों, अपमानजनक टिप्पणियों और सनसनीखेज खबरों के माध्यम से निशाना बनाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। ऐसी प्रवृत्तियां न केवल संबंधित व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं, बल्कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनविश्वास को भी कमजोर करती हैं।

बिहार इप्टा ने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता का दायित्व सत्ता और व्यवस्था से सवाल करना, तथ्यों को सामने लाना तथा जनहित के मुद्दों को निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना है, न कि पर्याप्त सत्यापन के बिना किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना।

बयान में पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि जब कोई स्त्री अपनी आवाज बुलंद करती है, सवाल उठाती है या प्रचलित सत्ता और व्यवस्था को चुनौती देती है, तो कई बार उसके सवालों का जवाब देने के बजाय उसे चुप कराने की कोशिश की जाती है। ऐसी कोशिशों में चरित्रहनन को हथियार बनाया जाना महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। परिषद् ने कहा कि नेहा सिंह राठौर को उनकी बेबाक अभिव्यक्ति के कारण पहले भी निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।

बिहार इप्टा राज्य परिषद् का मानना है कि संबंधित खबर को हटा देना या केवल खेद व्यक्त कर देना ही पर्याप्त नहीं है। प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना, सामग्री के प्रसारण की परिस्थितियों की समीक्षा करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है।

बिहार इप्टा राज्य परिषद् ने नेहा सिंह राठौर के प्रति अपना समर्थन और एकजुटता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उक्त मीडिया संस्थान के खिलाफ उनके संघर्ष में इप्टा उनके साथ खड़ी है। परिषद् ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, महिलाओं की गरिमा और जिम्मेदार पत्रकारिता के पक्ष में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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