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प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर डालसा सारण में सजी काव्य संध्या, लिटरेरी क्लब का हुआ शुभारंभ

डॉ. अमित रंजन ने प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर ई-बुक फार्मेट में प्रकाशित और हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान शिक्षाविद प्रो0 वीरेन्द्र नारायण यादव द्वारा लोकार्पित अपनी ग़ज़ल, कविता एवं गीत संग्रह "मौसिकी : अहसासों का आसमान" से चयनित ग़ज़लों के साथ चर्चित कविता "स्त्री देह की जिरह में खड़ी इंसानियत" का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं की भरपूर सराहना अर्जित की।

छपरा, 31 जुलाई। सारण जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के कार्यालय में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर साहित्य, समाज और संवेदना को समर्पित भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए वक्ताओं ने उन्हें भारतीय जनजीवन का अमर कथाकार बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षाविद एवं हिन्दी के मूर्धन्य विद्वान प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव तथा जिला जज एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री राघवेन्द्र विक्रम सिंह परमार ने प्रेमचंद के कथा साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक न्याय, मानवीय मूल्यों और लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त दस्तावेज है।

कार्यक्रम में जिला जज एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री अनुराग कुमार त्रिपाठी, जिला जज एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री श्रीकांत सिंह, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण श्री राजीव कुमार, जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष रवि रंजन प्रसाद सिंह तथा चीफ एलएडीसीएस पूर्णेंदु रंजन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि दक्ष निरंजन शंभू ने की, जबकि सफल संचालन प्रो. शकील अनवर ने किया।

काव्य पाठ के क्रम में सचिव श्री राजीव कुमार ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुत की। अध्यक्ष दक्ष निरंजन शंभू ने गीतों से श्रोताओं को भावविभोर किया, वहीं प्रो. शकील अनवर ने अपनी प्रभावशाली ग़ज़लों से समां बाँध दिया।

डॉ. अमित रंजन ने प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर ई-बुक फार्मेट में प्रकाशित और हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान शिक्षाविद प्रो0 वीरेन्द्र नारायण यादव द्वारा लोकार्पित अपनी ग़ज़ल, कविता एवं गीत संग्रह “मौसिकी : अहसासों का आसमान” से चयनित ग़ज़लों के साथ चर्चित कविता “स्त्री देह की जिरह में खड़ी इंसानियत” का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं की भरपूर सराहना अर्जित की।

इसके अलावा मोईज बहमनबरवी ने ग़ज़ल, सुरेश चौबे ने गीत, सुशांत सिंह मोहित ने नई कविता, सुहैल अहमद हाशमी ने ग़ज़ल एवं मुक्त मिसरे, डॉ. अमरेन्द्र सिंह ने नई कविता, निर्भय नीर ने ग़ज़ल, राजनंदिनी ने शृंगार गीत, धनंजय उदय, अमन वत्स एवं आदित्य मिश्रा ने अपनी रचनाओं से काव्य गोष्ठी को ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।

इस अवसर पर डालसा सारण के लिटरेरी क्लब की औपचारिक शुरुआत भी की गई। उपस्थित साहित्यकारों एवं न्यायिक पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि क्लब के तत्वावधान में अगली काव्य गोष्ठी 27 अगस्त को आयोजित की जाएगी।

सभी वक्ताओं और कवि शायरों ने प्रेमचंद की जयंती पर साहित्यिक गतिविधियों के शहर में साहित्यिक गतिविधियों के क्षरण के बीच इस अति विशिष्ट आयोजन के लिए सचिव राजीव कुमार की भूरि- भूरि प्रशंसा की और आने वाले दिनों में लिटरेरी क्लब द्वारा बड़ा साहित्यिक हस्तक्षेप करने की संभावना जताई।

कार्यक्रम में रिटेनर लॉयर डॉ. मुन्नी कुमारी, सीपीएस ग्रुप के चेयरमैन डॉ. हरेन्द्र सिंह, पैनल अधिवक्ता सुनीता कुमारी, खुशबू कुमारी, अधिवक्ता शैलेन्द्र कुमार शाही, बबुआ नन्द द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण, प्रशिक्षु अधिवक्ता एवं डालसा के कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने साहित्यिक प्रस्तुतियों का रसास्वादन करते हुए काव्यानंद प्राप्त किया।

कार्यक्रम का समापन प्रेमचंद के साहित्यिक आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने तथा साहित्य और विधि के मानवीय सरोकारों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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