24,725 लोग बाढ़ की चपेट में, 33 नावें, बोट एंबुलेंस और तीन NDRF/SDRF टीमें तैनात
छपरा। गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच सारण के 18 पंचायतों के 48 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 24,725 लोग बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि 4,220 परिवार प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज करते हुए 33 नावें, एक बोट एंबुलेंस और तीन NDRF/SDRF टीमें उपलब्ध कराई हैं। वहीं बाढ़ प्रभावितों तक भोजन पहुंचाने के लिए 14 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं, जहां करीब पांच हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है।
30 सितंबर को अपराह्न चार बजे तक की जिला प्रशासन की बाढ़ स्थिति रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर संबंधित पदाधिकारी जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को संचालित कर रहे हैं।
पांच चिकित्सा शिविर, एक राहत केंद्र संचालित
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पांच चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। लोगों के आवागमन और राहत कार्य के लिए 33 नावें तथा एक बोट एंबुलेंस उपलब्ध है। पशुओं के उपचार के लिए भी पशु चिकित्सा शिविर की व्यवस्था की गई है। एक राहत केंद्र में 50 आश्रयार्थी रह रहे हैं। राहत कार्यों के लिए तीन NDRF/SDRF टीमें भी उपलब्ध हैं।
प्रभावित परिवारों को तत्काल जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने के क्रम में 950 पॉलीथिन शीट का वितरण किया गया है। प्रशासन की ओर से आवश्यकता के अनुसार अन्य राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
14 सामुदायिक रसोई में पांच हजार लोगों के लिए भोजन
बाढ़ प्रभावितों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर और परसा प्रखंडों में कुल 14 सामुदायिक रसोई संचालित हैं। इन रसोइयों के माध्यम से करीब पांच हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है।
प्रखंडवार स्थिति के अनुसार पानापुर में दो, तरैया में तीन, अमनौर में एक, मकेर में पांच और परसा में तीन सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।
तरैया में चंचलिया, माधोपुर एवं भटगाई में सामुदायिक रसोई चल रही है। वहीं मकेर में बाघाकोल, कस्बा मकेर, भाथा, पीर मकेर एवं तरैया-अमनौर क्षेत्र में रसोई संचालित है।
स्थिति पर लगातार नजर
जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य जरूरी सहायता समय पर पहुंचाई जाए। जलस्तर एवं स्थानीय परिस्थितियों में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को और विस्तारित किया जाएगा।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। नदी एवं तटबंध के संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है।



