समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों के बीच पहुंचकर अधिकारियों ने पेश की संवेदनशील प्रशासनिक पहल की मिसाल, बच्चों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान
छपरा (सारण), 08 नवंबर 2026। दीपावली का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब खुशियों का उजाला समाज के हर घर तक पहुंचे और उत्सव की रोशनी में कोई भी परिवार खुद को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे। इसी मानवीय भावना, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रोशन कुमार ने महादलित टोलों में पहुंचकर स्थानीय परिवारों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। प्रशासनिक दायित्वों की व्यस्तता के बीच समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के बीच पहुंचकर त्योहार मनाने की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय और प्रेरणादायक है।

दोनों वरीय अधिकारियों ने महादलित बस्तियों में लोगों के साथ मिलकर दीप जलाए और उनके घर-आंगन को दीपावली की रोशनी से जगमग किया। इस अवसर पर भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। बाबा साहेब के विचारों को स्मरण करते हुए समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय की भावना को भी इस आयोजन ने रेखांकित किया।

इस अवसर पर बच्चों और उनके परिवारों के बीच मिठाइयां, मोमबत्तियां, फुलझड़ियां एवं पटाखे वितरित किए गए। उपहार पाकर बच्चों की आंखों में चमक और चेहरों पर खिली मुस्कान इस आयोजन की सबसे खूबसूरत उपलब्धि रही। अधिकारियों ने केवल सामग्री का वितरण ही नहीं किया, बल्कि लोगों के बीच बैठकर उनके साथ त्योहार की आत्मीयता साझा की। यह दृश्य प्रशासन और आम नागरिकों के बीच मानवीय रिश्तों की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहा था।

आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान उनके निर्णयों, बैठकों, निरीक्षणों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से होती है, लेकिन जब यही अधिकारी समाज के कमजोर और वंचित तबकों के बीच पहुंचकर उनके सुख-दुख और उत्सव में सहभागी बनते हैं, तो प्रशासन का एक संवेदनशील और मानवीय चेहरा सामने आता है। जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की यह पहल इसी सकारात्मक सोच का परिचायक है। इससे यह संदेश भी जाता है कि प्रशासन केवल शासन और व्यवस्था का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के साथ खड़े रहने वाली एक जिम्मेदार संस्था भी है।

विशेष रूप से महादलित टोलों में दीपावली मनाने का यह प्रयास सामाजिक समरसता, समावेशिता, समानता, अपनत्व और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने वाला है। यह बताता है कि त्योहारों की खुशियां जाति, वर्ग, आर्थिक स्थिति अथवा सामाजिक हैसियत की सीमाओं में नहीं बंधनी चाहिए। समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी सम्मान, सहभागिता और खुशियों में बराबरी का स्थान मिले।

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव एवं वरीय पुलिस अधीक्षक रोशन कुमार की इस पहल के लिए निश्चित रूप से साधुवाद बनता है। ऐसे छोटे-छोटे मानवीय प्रयास समाज में विश्वास का बड़ा आधार तैयार करते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन की यह संवेदनशील पहल अन्य अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं को भी प्रेरित करेगी, ताकि पर्व-त्योहारों की खुशियां समाज के हर तबके तक पहुंचें।

सचमुच, दीपावली के हजारों दीपों के बीच सबसे खूबसूरत रोशनी वह थी, जो महादलित बस्तियों के बच्चों की आंखों में चमक रही थी। क्योंकि दीप जलाना एक परंपरा है, लेकिन किसी के जीवन में खुशी और अपनत्व का उजाला भरना सच्ची इंसानियत है। सारण के दोनों वरीय अधिकारियों की यह पहल इसी इंसानियत और लोकसेवा की भावना को सलाम करती है।



