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दिनकर जयंती पर सजी ‘मौसिकी’ की शाम, कविता-ग़ज़ल में गूंजे समाज के सवाल

डालसा सचिव एवं एसीजेएम राजीव कुमार ने दुष्यंत कुमार की शैली और प्रेम के रंग में हास्य-व्यंग्य से पगी दो ग़ज़लें सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।

लिटरेरी क्लब की तीसरी मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने प्रेम, स्त्री-विमर्श, राष्ट्रप्रेम, भूख और सामाजिक सरोकारों को दी आवाज़

छपरा। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर डालसा, सारण के सभागार में डालसा लिटरेरी क्लब की तीसरी मासिक काव्य गोष्ठी में कविता, गीत और ग़ज़ल की खुशनुमा शाम सजी। गोष्ठी में साहित्य के विभिन्न रंगों के साथ समकालीन समाज के ज्वलंत सवाल भी मुखर हुए।

गोष्ठी का आगाज़ युवा कवि उद्भव शांडिल्य ने अपनी कविताओं से किया। राजनंदिनी ने स्त्री-विमर्श पर भावविभोर कर देने वाली कविता प्रस्तुत की। रत्नम ने राष्ट्रप्रेम की कविताओं का पाठ किया, जबकि डॉ. सुदर्शन राय ने भोजपुरी कविता के माध्यम से लोक-संवेदना को स्वर दिया। ऐनुल बरौलवी ने दिनकर को समर्पित ग़ज़ल सुनाकर वातावरण को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

सुरेश चौबे ने अपने बेहतरीन गीत से श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। राकेश कुमार विद्यार्थी, नज़मुल्लाह नज़्म और बेतुल्लाह वैद्य ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी ग़ज़लों के माध्यम से समकालीन जीवन की विडंबनाओं को सामने रखा। अधिवक्ता विकास सिंह राठौर ने जब माँ पर मार्मिक कविता पढ़ी तो सभागार में मौजूद कई श्रोताओं की आँखें नम हो गईं।

डालसा सचिव एवं एसीजेएम राजीव कुमार ने दुष्यंत कुमार की शैली और प्रेम के रंग में हास्य-व्यंग्य से पगी दो ग़ज़लें सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। भयंकर छपरहवी ने अपने हास्य-व्यंग्य से महफ़िल में ठहाके बिखेरे। उस्ताद शायर सुहैल अहमद हाशमी ने अपनी रुबाइयों और ग़ज़लों के जरिए आम जनता की परेशानियों को आवाज़ दी। अमरेन्द्र सिंह ‘बुलेट’ ने अपने तीखे मिसरों के माध्यम से सामाजिक और सियासी सवाल उठाए।

गोष्ठी के संचालक, रिटेनर लॉयर, कवि-शायर एवं रंगकर्मी डॉ. अमित रंजन ने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से व्यवस्था और समाज के अंतर्विरोधों को स्वर दिया—

> “इल्म का चेहरा सियासी गोद में जब पड़ गया,
एक सादा ख़्वाब फिर से आदमी को छल गया।
माँ दुआ के हाथ फैलाए रही चौखट के पार,
उसका बेटा भीड़ की संगत में जाकर ढल गया।”

इन पंक्तियों ने सभागार में मौजूद श्रोताओं को गंभीर सामाजिक सवालों पर सोचने के लिए विवश किया।

वरिष्ठ कवि-शायर एवं गुरु दक्ष निरंजन शंभु ने भूख और प्रकृति की पीड़ा को अपनी रचनाओं में आवाज़ दी। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता शैलेन्द्र कुमार शाही ने सरल शब्दों में गूढ़ भावों को अभिव्यक्त करते हुए अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।

दिनकर जयंती के अवसर पर आयोजित इस काव्य संध्या में कविता और ग़ज़ल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि प्रेम, संवेदना, स्त्री-अस्मिता, राष्ट्रभाव, भूख, प्रकृति और सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों पर संवाद का माध्यम बनी।

डालसा सचिव एवं एसीजेएम राजीव कुमार ने सभी कवि-शायरों के प्रति आभार व्यक्त किया। गोष्ठी का सफल संचालन डॉ. अमित रंजन ने किया तथा अध्यक्षता अधिवक्ता शैलेन्द्र कुमार शाही ने की।

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