सारण में आपदा प्रबंधन तैयारियों की बड़ी समीक्षा, 199 राहत शिविर और 178 सामुदायिक रसोई स्थल चिन्हित
छपरा, 25 मई 2026। संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सारण जिला प्रशासन की तैयारियों एवं कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा को लेकर समाहरणालय सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री-सह-प्रभारी मंत्री सारण जिला ने की।
बैठक में प्रभारी मंत्री ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को पूरी तरह “अलर्ट एंड अवेयर” मोड में रहने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में आमजन तक त्वरित राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से जिले की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विगत पांच वर्षों के वर्षापात के आंकड़ों का विश्लेषण कर व्यापक आपदा प्रबंधन योजना तैयार की गई है तथा एसओपी के अनुरूप सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
जिले में उपलब्ध संसाधनों की विस्तृत मैपिंग करते हुए बताया गया कि वर्तमान में 31,881 पॉलिथीन शीट उपलब्ध हैं। प्रमंडल का नोडल जिला होने के कारण अन्य जिलों को भी आवश्यकता पड़ने पर पॉलिथीन शीट उपलब्ध कराने हेतु निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। लाइफ जैकेट और महाजाल की आपूर्ति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 198 निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल नावों का परिचालन कराया जा सके। प्रभावित परिवारों के लिए ड्राई राशन एवं फूड पैकेट तैयार करने हेतु पैकेजिंग स्थलों की पहचान भी कर ली गई है।
प्रशासन द्वारा जिले में 199 बाढ़ राहत शिविर तथा 178 सामुदायिक रसोई स्थलों को चिन्हित किया गया है। वहीं, पात्र परिवारों को आपदा संपूर्ति पोर्टल के माध्यम से सीधे बैंक खाते में 7 हजार रुपये प्रति परिवार की दर से अनुग्रहिक अनुदान राशि भेजने हेतु सत्यापन प्रक्रिया को अद्यतन कर लिया गया है।
तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संवेदनशील 10 स्थलों में से 5 पर कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष पांच स्थलों पर कार्य जारी है। प्रभारी मंत्री ने शेष कार्य इस माह के अंत तक पूरा करने का निर्देश दिया।
बैठक में नल-जल योजनाओं एवं पेयजल आपूर्ति की भी समीक्षा हुई। बताया गया कि जिले की 4,330 योजनाओं में से 560 में तकनीकी समस्या थी, जिनमें 542 योजनाओं को मरम्मत के बाद पुनः चालू कर दिया गया है। शेष योजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। पेयजल संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए 06152-244791 हेल्पलाइन जारी की गई है, जो प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक कार्यरत है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 162 स्टेटिक मेडिकल टीम एवं 52 मोबाइल मेडिकल टीम गठित की गई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ जिले में 32 पशु राहत शिविर स्थलों को भी चिन्हित किया गया है।
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्यरत है, जिसका दूरभाष संख्या 06152-245023 निर्धारित किया गया है। वहीं संभावित सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए डीजल अनुदान एवं वैकल्पिक फसल योजना की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
बैठक के दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाईं। परसा विधायक डॉ० करिश्मा ने हरदिया चंवर में जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की, जबकि अमनौर विधायक कृष्ण कुमार सिंह मंटु ने रेवा घाट पर SDRF की स्थायी प्रतिनियुक्ति तथा एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही।
तरैया विधायक जनक सिंह ने तटबंध सुरक्षा कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग तथा SDRF टीमों की अलग-अलग संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती का सुझाव दिया। वहीं मांझी विधायक ने तेल नदी की गाद सफाई का मुद्दा उठाया। छपरा विधायक छोटी कुमारी ने फसल क्षति का त्वरित आकलन कर किसानों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की।
बैठक में सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार सिंह , विभिन्न विधायकगण, जिला परिषद अध्यक्षा, उप महापौर, जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।



