पटना, 30 जुलाई। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की राष्ट्रीय समिति ने प्रख्यात हिंदी कवि धूमिल की वाराणसी के विट्ठलपुर गांव स्थित प्रतिमा तथा महापंडित राहुल सांकृत्यायन की पश्चिम बंगाल के रानीगंज स्थित आदमकद प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की है। समिति ने इन घटनाओं को देश की सांस्कृतिक चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रगतिशील विरासत पर सुनियोजित हमला बताते हुए दोषियों की शीघ्र पहचान कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इप्टा राष्ट्रीय समिति ने कहा कि किसी कवि या साहित्यकार की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाना केवल पत्थर या धातु की मूर्ति को तोड़ना नहीं, बल्कि समाज की स्मृति, संघर्ष और वैचारिक विरासत को चोट पहुंचाने का प्रयास है। समिति के अनुसार कवि और साहित्यकार अपनी प्रतिमाओं में नहीं, बल्कि जनता की चेतना, भाषा और सपनों में जीवित रहते हैं।
समिति ने कहा कि आज जब स्मारकों और विशाल प्रतिमाओं के माध्यम से राजनीतिक अमरत्व की होड़ दिखाई दे रही है, ऐसे समय में समाज को मानवीय, लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक चेतना से समृद्ध करने वाले रचनाकारों की प्रतिमाओं पर हमला इतिहास को विकृत करने और आलोचनात्मक चेतना को कुंद करने की कोशिश है। बयान में कहा गया कि धूमिल ने अन्याय और सत्ता के छल को शब्द दिए, जबकि राहुल सांकृत्यायन ने ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टि और सामाजिक परिवर्तन की चेतना को जन-जन तक पहुंचाया। उनके विचारों को किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ से समाप्त नहीं किया जा सकता।
इप्टा राष्ट्रीय समिति ने देश की सभी लोकतांत्रिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और कलात्मक संस्थाओं के साथ-साथ नागरिक समाज से ऐसी घटनाओं के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज़ उठाने का आह्वान किया है। समिति ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत की रक्षा केवल सरकारों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। समिति ने सांस्कृतिक समुदाय से नफरत, असहिष्णुता और सांस्कृतिक विध्वंस के विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण सांस्कृतिक प्रतिरोध को और मजबूत करने की अपील की है। यह वक्तव्य इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रसन्ना, कार्यकारी अध्यक्ष राकेश तथा महासचिव तनवीर अख्तर की ओर से जारी किया गया।



