कानपुर: देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में वक्ताओं ने पत्रकारिता के मूल्यों, जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका पर गंभीर विमर्श किया। कार्यक्रम का आयोजन के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा ऑनलाइन माध्यम से किया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक ने कहा कि देवर्षि नारद की जो लोक छवि प्रचलित है, वह वास्तविकता से भिन्न है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारद जी के प्रत्येक संवाद में लोकमंगल की भावना निहित रहती है। उनके अनुसार विश्वसनीयता, सतत प्रवास और उद्देश्य की पवित्रता—ये तीन गुण हर पत्रकार के लिए अनिवार्य हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि देवर्षि नारद को भारतीय परंपरा में प्रथम पत्रकार माना जाता है, जिन्होंने सदैव सत्य और लोकहित को प्राथमिकता दी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ‘स्व’ का बोध राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है और पत्रकारिता के मूल्यों को संरक्षित रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।
व्याख्यान का विषय था—‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता में स्व का बोध’, जिसमें नारद जी के जीवन और कार्यशैली को आधुनिक पत्रकारिता के संदर्भ में समझाया गया। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि नारद जी सभी वर्गों से संवाद करते थे और उनकी हर यात्रा उद्देश्यपूर्ण होती थी, जिससे समाज का कल्याण संभव होता था।
विभागाध्यक्ष ने कहा कि यह दिन केवल जयंती नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों पर आत्ममंथन का अवसर है। कार्यक्रम के संयोजक ने ‘नारद संचार मॉडल’ को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभाग के अन्य शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि संवाद में सत्य, उद्देश्य और लोकहित ही पत्रकारिता की असली पहचान है।



