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कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर जोर, ‘पोष’ अधिनियम को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पॉक्सो (POCSO) न्यायाधीश श्रीमती स्मिता राज ने कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति के लिए वहां महिलाओं का सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ‘पोष’ अधिनियम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अवांछित व्यवहार या उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

 

छपरा 6 मई 2026: बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण, छपरा श्री पुनीत कुमार गर्ग के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण के प्रांगण में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH एक्ट) के प्रति जागरूकता हेतु एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पॉक्सो (POCSO) न्यायाधीश श्रीमती स्मिता राज उपस्थित रहीं। शिविर में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) श्री राजीव कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्रीमती साक्षी प्रखर, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आकाश कुमार, छपरा बार के सचिव शशि भूषण तिवारी, मुख्य लैंड्स पूर्णेन्दु रंजन, पैनल अधिवक्ता सुनीता कुमारी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि श्रीमती स्मिता राज ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी संस्था की प्रगति के लिए वहां महिलाओं का सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ‘पोष’ अधिनियम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अवांछित व्यवहार या उत्पीड़न को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

वहीं, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्रीमती साक्षी प्रखर ने उपस्थित महिला कर्मचारियों एवं अधिवक्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या या उत्पीड़न की स्थिति में वे बिना संकोच ‘पोष’ समिति के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों का निष्पक्ष एवं विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार श्री राजीव कुमार ने जानकारी दी कि जिन संस्थानों में 10 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (ICC) का गठन कानूनन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित महिला की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और उसे बिना किसी भय के शिकायत करने का अधिकार है।

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या सहायता के लिए महिलाएं कार्य दिवसों में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सारण के कार्यालय से संपर्क कर सकती हैं। इस जागरूकता शिविर का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाना और कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

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