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युद्ध मानवता के लिए सबसे बड़ा संकट, शांति और संस्कृति ही विकल्प : समी अहमद

समी अहमद ने कहा कि आज पूरी दुनिया युद्ध, भय और असहिष्णुता के संकट से गुजर रही है। ऐसे दौर में कला, साहित्य और संस्कृति की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल सीमाओं को ही नहीं तोड़ता, बल्कि मानवता, संवेदना और सभ्यता को भी गहरी चोट पहुँचाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और जनकला समाज में शांति, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है।

पटना, 25 मई 2026। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), पटना सिटी द्वारा इप्टा के 84वें स्थापना दिवस एवं काज़ी नज़रुल इस्लाम जयंती के अवसर पर “युद्ध मानव के हित में नहीं” विषय पर विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इप्टा, पटना सिटी के अध्यक्ष समी अहमद ने की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में समी अहमद ने कहा कि आज पूरी दुनिया युद्ध, भय और असहिष्णुता के संकट से गुजर रही है। ऐसे दौर में कला, साहित्य और संस्कृति की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल सीमाओं को ही नहीं तोड़ता, बल्कि मानवता, संवेदना और सभ्यता को भी गहरी चोट पहुँचाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और जनकला समाज में शांति, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है।

वरिष्ठ शिक्षाविद् सैयद इकबाल अफ़ज़ल ने समी अहमद को “बिहार का गांधी” बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शांति, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की आवाज बुलंद की है। प्रो. अफ़ज़ल ने युद्ध के कारण समाज, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और मानवीय संबंधों पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों की विस्तार से चर्चा की।

कॉमरेड विश्वजीत ने अपने वक्तव्य में नव-साम्राज्यवाद की नीतियों की आलोचना करते हुए क्यूबा और वेनेजुएला जैसे देशों की त्रासदी का उल्लेख किया। शिक्षाविद् विजय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व नेताओं में नियम और नैतिकता के अभाव के कारण दुनिया अयोग्य एवं निरंकुश शासकों द्वारा पैदा किए गए युद्धों की पीड़ा झेल रही है। अधिवक्ता शफुगुफ्ता रशीद ने कहा कि युद्ध और तनाव का असर आम जनता के जीवन, रोजगार और सामाजिक वातावरण पर प्रतिकूल रूप से पड़ता है।

कार्यक्रम के अंत में पटना सिटी के रंगकर्मियों, पत्रकारों एवं साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में नवीन रस्तोगी, रेहान गनी, नसीम अख्तर, आलोक चोपड़ा, नागेंद्र कुमार, अमरेंद्र मिश्र, संजय रॉय, सुनीता गुप्ता और ओंकार आनंद प्रमुख रूप से शामिल थे।

कार्यक्रम में देवरत्न प्रसाद, सरफराज आलम, प्रो. हरि ओम आर्य, कुमार लखन सहित इप्टा के दिवेश मिश्र, राजेश कुमार, मनोज सोनी, दीपक कुमार, मनीष कुमार, प्रियंका, वंदना देवी और जैनब आदि उपस्थित थे। समारोह में बड़ी संख्या में कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्कृति प्रेमियों ने भाग लिया।

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