HomeArt & Cultureसहरसा नाट्योत्सव में छपरा इप्टा के किशोर रंगकर्मी दिखाएंगे पर्यावरण की पुकार

सहरसा नाट्योत्सव में छपरा इप्टा के किशोर रंगकर्मी दिखाएंगे पर्यावरण की पुकार

नाटक के लेखक-निर्देशक एवं रंग-परिकल्पक डॉ० अमित रंजन ने कहा, “रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को समझने, सवाल उठाने और बदलाव की चेतना पैदा करने का माध्यम है। ‘द लास्ट क्राई’ में पर्यावरण का सवाल किशोर रंगकर्मियों की दृष्टि और संवेदना के माध्यम से सामने आएगा।”

23 सितंबर को सीपीएस के ऑडिटोरियम में होगा नाटक ‘द लास्ट क्राई’ का पहला मंचन

छपरा। बिहार इप्टा के राज्यस्तरीय नाट्योत्सव ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ में इस बार छपरा के किशोर रंगकर्मियों की आवाज भी गूंजेगी। 02 से 04 अक्टूबर तक सहरसा में आयोजित नाट्योत्सव में बिहार की छह चयनित टीमों में छपरा इप्टा की टीम को भी प्रस्तुति के लिए चुना गया है। छपरा इप्टा 03 अक्टूबर को पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित डॉ० अमित रंजन द्वारा लिखित, निर्देशित एवं रंग-परिकल्पित नाटक ‘द लास्ट क्राई’ प्रस्तुत करेगी।

नाटक की खासियत यह है कि इसमें सेंट्रल पब्लिक स्कूल, चाँदमारी के ढाई दर्जन से अधिक किशोर रंगकर्मी अभिनय कर रहे हैं।

प्रस्तुति के मद्देनज़र दो दिवसीय नाट्य कार्यशाला सम्पन्न

प्रस्तुति की तैयारी को लेकर छपरा इप्टा द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड थिएटर वर्कशॉप सेंट्रल पब्लिक स्कूल में सम्पन्न हुई। कार्यशाला में प्रतिभागियों को अभिनय, शरीर की अभिव्यक्ति, स्वर एवं उच्चारण, दृश्य-संरचना, प्रस्तुति तथा रंगमंच और समाज के रिश्ते से जुड़े पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में रानावि सिक्किम के स्नातक एवं नाटक में रिसर्च स्कॉलर कुमार सुमित प्रशिक्षक, सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी समन्वयक तथा डॉ० अमित रंजन निदेशक के रूप में शामिल रहे। विभिन्न रंग-अभ्यासों और गतिविधियों के माध्यम से किशोर कलाकारों ने सामूहिक अभिनय, शरीर और आवाज के प्रयोग तथा मंचीय अनुशासन की बारीकियां सीखीं।

कुमार सुमित ने कहा, “रंगमंच की असली ताकत सामूहिकता और अनुभव से सीखने में है। इस कार्यशाला में बच्चों ने अभिनय को केवल संवाद बोलने के रूप में नहीं, बल्कि शरीर, आवाज, भाव और पूरे दृश्य को समझते हुए सीखने की कोशिश की है। इतने कम समय में उनकी सक्रियता और सीखने की ललक उल्लेखनीय रही।”

कार्यशाला के समन्वयक सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा, “नई पीढ़ी को रंगमंच से जोड़ना छपरा इप्टा की निरंतर प्राथमिकता रही है। किशोर कलाकारों के माध्यम से पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषय को मंच पर लाना अपने आप में सार्थक प्रयास है। कार्यशाला ने बच्चों को एक टीम के रूप में काम करने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अवसर दिया।”

नाटक के लेखक-निर्देशक एवं रंग-परिकल्पक डॉ० अमित रंजन ने कहा, “रंगमंच केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को समझने, सवाल उठाने और बदलाव की चेतना पैदा करने का माध्यम है। ‘द लास्ट क्राई’ में पर्यावरण का सवाल किशोर रंगकर्मियों की दृष्टि और संवेदना के माध्यम से सामने आएगा।”

मंच पर ये किशोर रंगकर्मी

नाटक में समृद्धि श्रेया, समर प्रताप सिंह, विराट कुमार सिंह, अनुभव सिंह, शगुन सिंह, आर्यन कुमार सिंह, प्रीति कुमारी, स्मृति गौतम, रिया शर्मा, युवराज सिंह, राजन गुप्ता, श्रेया सिंह, ऋषभ राज, अश्विनी सिंह, श्रुति कुमारी, गरिमा कुमारी, आदित्य कुमार गुप्ता, आकृति कुमारी वर्मा, खुशी कुमारी, आराध्या सिंह और वंशिका सहित अन्य कलाकार शामिल हैं। सामाजिक पात्रों में शैलेन्द्र कुमार शाही, विनय कुमार, मानिक कुमार तथा आयुष कुमार मान की भूमिका है।

नाटक का संगीत निर्देशन कंचन बाला का है। सह-निर्देशक शैलेन्द्र कुमार शाही एवं शालनी कुमारी, सह-निर्देशक संगीत विनय कुमार, जबकि लाइट, माइक एवं प्रॉप्स आयुष कुमार संभालेंगे। वस्त्र-रूप सज्जा में गरिमा कुमारी, प्रीति कुमारी, समर प्रताप सिंह एवं विराट कुमार सिंह की भूमिका है।

23 सितंबर को होगी पहली प्रस्तुति

सहरसा में राज्यस्तरीय प्रस्तुति से पहले ‘द लास्ट क्राई’ का प्रथम मंचन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर 23 सितंबर 2026 को शाम 6 बजे सेंट्रल पब्लिक स्कूल, चाँदमारी, छपरा के ऑडिटोरियम में होगा। इसके बाद टीम 03 अक्टूबर को सहरसा के राज्यस्तरीय नाट्योत्सव में अपनी प्रस्तुति देगी।

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