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डालसा के सभागार में गूंजे कविता के स्वर, किशोर कवियों से वरिष्ठ शायरों तक सजी साहित्य की महफ़िल

लिटरेरी क्लब की अगली मासिक काव्य गोष्ठी 24 सितम्बर को आयोजित होगी।

डालसा लिटरेरी क्लब की मासिक काव्य गोष्ठी में न्यायिक अधिकारियों और साहित्यकारों का अनूठा संगम

छपरा। न्याय के परिसर में जब कविता ने दस्तक दी तो डालसा का सभागार संवेदनाओं, शब्दों और सुरों से जीवंत हो उठा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), सारण, छपरा के सभागार में गुरुवार को लिटरेरी क्लब की मासिक काव्य गोष्ठी साहित्यिक उल्लास के बीच सम्पन्न हुई। न्यायिक अधिकारियों, वरिष्ठ साहित्यकारों और नवोदित किशोर कवियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।

किशोर कवियों ने बांधा समां, नई पीढ़ी ने दिखाई साहित्य की उम्मीद

गोष्ठी की सबसे खास और उल्लेखनीय शुरुआत नवोदित किशोर कवियों से हुई। रौनक कुमार सिंह, पलक कुमारी, श्वेता सिंह और रत्नम कुमार ने अपनी रचनाओं का पाठ कर उपस्थित श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। उनकी प्रस्तुतियों में उम्र की मासूमियत के साथ कल्पना, संवेदना और रचनात्मक ऊर्जा का खूबसूरत संगम देखने को मिला।

वरिष्ठ कवियों-शायरों ने सजाई महफ़िल

इसके बाद वरिष्ठ कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से काव्य-संध्या को समृद्ध किया। दक्ष निरंजन शंभू, रिपुंजय निशांत, सुरेश चौबे, निर्भय नीर, सोहैल अहमद हाशमी, डॉ. अमित रंजन, शिशिर कुमार श्रीवास्तव, धनंजय कुमार, डॉ. लालबाबू यादव और सोनू ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। संचालक प्रो. शकील अनवर और अध्यक्ष साक्षी प्रखर ने भी अपने कलाम से गोष्ठी को नई ऊंचाई दी।

कविता, ग़ज़ल और गीतों के विविध रंगों से सजी इस साहित्यिक शाम में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएं, रिश्तों की ऊष्मा और जीवन के विविध अनुभव शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त हुए। रचनाओं पर श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं और तालियों से सभागार लगातार गूंजता रहा।

न्यायिक अधिकारियों की साहित्यिक सहभागिता बनी आकर्षण

कार्यक्रम में0एसीजेएम-सह-सचिव, डालसा राजीव कुमार, एसीजेएम-9 संजय कुमार, सिविल जज साक्षी प्रखर, डॉ. लालबाबू यादव, डॉ. हरेन्द्र सिंह और डॉ. अमित रंजन सहित साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल जज साक्षी प्रखर ने की, जबकि प्रो. शकील अनवर ने प्रभावी एवं रोचक संचालन से काव्य गोष्ठी को निरंतर गति प्रदान की।

गोष्ठी ने यह संदेश भी दिया कि न्याय का संसार केवल कानून की धाराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदना, मानवीयता और सृजनात्मक चेतना भी न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला हैं। डालसा के सभागार में साहित्य और न्यायिक परिवेश का यह संगम उपस्थित लोगों के लिए यादगार बन गया।

लिटरेरी क्लब की अगली मासिक काव्य गोष्ठी 24 सितम्बर को आयोजित होगी।

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