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सहयोग शिविर के जरिए 30 दिनों में होगा समस्याओं का समाधान, लापरवाही पर 31वें दिन स्वतः निलंबन : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब बिहार के सभी पंचायतों में प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाया जाएगा, जहां आमजन अपनी समस्याओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि सभी आवेदनों का निष्पादन हर हाल में 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा और इसकी रियल टाइम मॉनिटरिंग जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक करेंगे।

पटना, 11 मई 2026। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले ‘सहयोग शिविर’ का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “जब तक लोगों के आवेदन आने बंद नहीं होंगे, तब तक यह सहयोग शिविर चलता रहेगा।”

मुख्यमंत्री सोमवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 एवं सहयोग पोर्टल के रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब बिहार के सभी पंचायतों में प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाया जाएगा, जहां आमजन अपनी समस्याओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि सभी आवेदनों का निष्पादन हर हाल में 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा और इसकी रियल टाइम मॉनिटरिंग जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक करेंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई पदाधिकारी 30 दिनों के भीतर आवेदन का निष्पादन नहीं करता, आदेश पारित नहीं करता, फाइल लंबित रखता है या लापरवाही बरतता है, तो वह स्वतः 31वें दिन निलंबित माना जाएगा। इसके लिए पोर्टल पर ऑनलाइन सस्पेंशन फॉर्मेट स्वतः जेनरेट होने की व्यवस्था भी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक लोगों के आवेदन विभिन्न कार्यालयों में लंबित पड़े रहते थे और उनके निष्पादन की कोई तय समय-सीमा नहीं थी, जिससे जनता को भारी परेशानी होती थी। नई व्यवस्था के तहत पंचायत स्तर पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा ताकि लोगों को अनावश्यक दौड़-भाग न करनी पड़े।

मुख्यमंत्री ने भूमि विवादों के निष्पक्ष समाधान पर भी जोर देते हुए कहा कि सभी सरकारी और निजी जमीनों का स्पष्ट रिकॉर्ड रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि सरकारी भूमि पर लंबे समय से बसे लोगों का भी विवरण तैयार किया जाए ताकि सरकार उनकी स्थिति से अवगत रह सके।

उन्होंने बताया कि आईटी विभाग द्वारा सभी प्रखंड, अंचल एवं थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि वहां की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत सरकार भवनों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है ताकि पंचायत स्तर पर ही अधिकतर सरकारी कार्यों का निष्पादन संभव हो सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रोस्टर बनाकर पंचायतों में जाकर सहयोग शिविरों की निगरानी करें। उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन, भूमि विवाद, पुलिस मामलों तथा सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान भी 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सहयोग हेल्पलाइन और पोर्टल की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था नागरिकों की समस्याओं के एकीकृत एवं पारदर्शी समाधान के उद्देश्य से विकसित की गई है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री , ग्रामीण विकास मंत्री , राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री , नगर विकास एवं आवास मंत्री , मुख्य सचिव , पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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