मां के संस्कार ही समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी : छोटी कुमारी
छपरा। ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की छपरा इकाई द्वारा मातृ दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मातृत्व, संस्कार और नारी सशक्तिकरण के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छोटी कुमारी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शहर के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं ईश्वरीय गीत के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन बहन प्रियांशु ने किया, जबकि मेडिटेशन भाई हरेंद्र द्वारा सभी को राजयोग मेडिटेशन कराया गया। मेडिटेशन के माध्यम से उपस्थित लोगों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मबल का संदेश दिया गया।
मुख्य अतिथि छोटी कुमारी ने कहा कि मां केवल परिवार की आधारशिला नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार, अनुशासन और संवेदनशीलता देने में मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने मातृ शक्ति को सम्मान देने और महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इकाई की संचालिका बी०के० अनामिका दीदी ने कहा कि मातृत्व त्याग, प्रेम और सहनशीलता का सर्वोच्च स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जीवनशैली में आध्यात्मिकता ही परिवारों को जोड़कर रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी को सकारात्मक चिंतन और आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
डॉ० प्रियंका कुमारी ने कहा कि मां का स्नेह जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने में माताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इनरव्हील क्लब की चेयरपर्सन प्रिया कुमारी ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि सशक्त मां ही सशक्त समाज का निर्माण कर सकती है।
अवकाश प्राप्त प्राचार्या मीरा पुरी ने कहा कि मां बच्चों की प्रथम गुरु होती है। उन्होंने कहा कि परिवार में संस्कार और शिक्षा का वातावरण तैयार करने में माताओं की भूमिका सबसे अहम होती है।
शिक्षिका कंचन बाला ने कहा कि मातृ दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि मां के त्याग और समर्पण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। वहीं धर्मेन्द्र कुमार शाह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मां को देवी का स्वरूप माना गया है और हमें हमेशा उनका सम्मान करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी एवं समाजोपयोगी बताया।



