सिंगर के खिलाफ कथित भ्रामक और अपमानजनक खबर की राष्ट्रीय समिति ने की कड़ी निंदा, निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की राष्ट्रीय समिति ने जानी-मानी लोकगायिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता नेहा सिंह राठौर को लेकर एक राष्ट्रीय खबरिया चैनल पर प्रसारित कथित झूठी, भ्रामक और अपमानजनक खबर की कड़े शब्दों में निंदा की है। इप्टा ने इसे किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर सवालों का मामला बताया है।
इप्टा की राष्ट्रीय समिति ने अपने बयान में कहा कि नेहा सिंह राठौर अपनी लोकगायकी के माध्यम से आम जनता की समस्याओं, सामाजिक विसंगतियों और सत्ता से जुड़े सवालों को बेबाकी से उठाती रही हैं। लोकतंत्र में सत्ता से सवाल करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों की पड़ताल, निष्पक्षता और पत्रकारिता के बुनियादी मूल्यों का पालन करें।
समिति ने कहा कि जब कोई मीडिया संस्थान तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बजाय किसी नागरिक की छवि धूमिल करने का माध्यम बनता है, तो इससे न केवल संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि स्वतंत्र अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक संवाद भी कमजोर पड़ते हैं। बयान में सत्ता के प्रति पक्षपाती रवैया अपनाने और सवाल उठाने वाली आवाजों को निशाना बनाने की कथित मीडिया प्रवृत्ति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। इप्टा के अनुसार, पत्रकारिता का दायित्व सत्ता के प्रचार तंत्र के रूप में काम करना नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह रहते हुए सच को सामने लाना है।
इप्टा ने नेहा सिंह राठौर के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी महिला को अपमानित करने, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने या उसके विरुद्ध दुष्प्रचार के जरिए उसकी आवाज दबाने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। एक महिला के आत्मसम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा लोकतांत्रिक समाज की साझा जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
इप्टा की राष्ट्रीय समिति ने सरकार से कार्रवाई की अपेक्षा जताने के बजाय संबंधित नियामक संस्थाओं और सर्वोच्च न्यायालय से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। समिति ने कहा कि यदि जांच में खबर के भीतर झूठे, भ्रामक अथवा मानहानिकारक तथ्य प्रसारित किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित चैनल के विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
बयान में न्यूज़ संस्थान की ओर से जारी खंडन को भी समिति ने अपर्याप्त बताते हुए खारिज किया है। इप्टा का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल औपचारिक स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि तथ्यों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
समिति ने आम जनता से भी अपील की है कि वह मीडिया में प्रसारित खबरों को विवेकपूर्ण ढंग से परखे, तथ्यों की पुष्टि करे, सच के पक्ष में खड़ी आवाजों का समर्थन करे और गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता के विरुद्ध लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराए।
बयान के अंत में इप्टा ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सच के साथ खड़ा रहना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना और किसी भी नागरिक के सम्मान पर होने वाले हमले का विरोध करना उसकी सांस्कृतिक एवं लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।



