‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ में आधे दर्जन नाट्य प्रस्तुतियों के साथ रंग विमर्श, जनगीत, संगीत और युवाओं से रंग संवाद
सहरसा, 26 सितंबर 2026। भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा) की बिहार राज्य इकाई के तत्वावधान में ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ विषय पर बिहार इप्टा राज्यस्तरीय नाट्योत्सव 2026 का आयोजन 2, 3 और 4 अक्टूबर को सहरसा में किया जाएगा। आयोजन का मुख्य स्थल आर्यावर्त वैली पाठशाला परिसर, जिला परिषद, सहरसा होगा। तीन दिवसीय आयोजन में बिहार के विभिन्न जिलों की इप्टा इकाइयों द्वारा नाट्य प्रस्तुतियों के साथ जनगीत-संगीत, नृत्य, लघु नाटक, रंग विमर्श और युवाओं के साथ रंग संवाद आयोजित किए जाएंगे।
2 अक्टूबर : उद्घाटन और दो नाटकों का मंचन
नाट्योत्सव का उद्घाटन 2 अक्टूबर की शाम 5 बजे होगा। उद्घाटन अवसर पर बिहार इप्टा के कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम सिंह झंडोत्तोलन करेंगे तथा बिहार इप्टा द्वारा जनगीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि शिक्षाविद् प्रो. तरुण कुमार होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीताराम सिंह, अमरनाथ सिंह तथा सहरसा इप्टा के अध्यक्ष विनय कशोधन करेंगे।
इस अवसर पर शिक्षाविद् डॉ. दीपक कुमार गुप्ता सहित बिहार इप्टा के पदाधिकारी एवं विभिन्न जिलों के रंगकर्मी उपस्थित रहेंगे। बिहार इप्टा के कार्यवाहक महासचिव फिरोज अशरफ खान अपनी बात रखेंगे। स्वागत वक्तव्य बिहार इप्टा के सचिव एवं नाट्योत्सव संयोजक राजन कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन सहरसा इप्टा के सचिव रमेश कुमार पासवान करेंगे।
उद्घाटन सत्र के बाद भागलपुर इप्टा की प्रस्तुति ‘डार्क लाइफ’ होगी, जिसके लेखक एवं निर्देशक रितेश रंजन हैं। इसके बाद मधुबनी इप्टा द्वारा ‘महाभारत एक्सटेंशन’ प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लेखक डॉ. वागीश कुमार झा तथा निर्देशक रंजीत राय हैं।
3 अक्टूबर : सहरसा और छपरा की नाट्य प्रस्तुतियां
3 अक्टूबर की शाम 6 बजे नाट्य प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहेगा। सहरसा इप्टा द्वारा ‘छूड़ा के बँहियाँ’ का मंचन किया जाएगा, जिसका नाट्य परिकल्पन डॉ. दीपक कुमार गुप्ता ने किया है।
इसके बाद छपरा इप्टा की पर्यावरण-केंद्रित प्रस्तुति ‘द लास्ट क्राई’ का मंचन होगा। लगभग 50 मिनट की इस प्रस्तुति के लेखक, निर्देशक एवं रंग परिकल्पक डॉ. अमित रंजन हैं तथा संगीत निर्देशन कंचन बाला का है। नाटक प्रकृति के विनाश, पर्यावरण संकट और विकास की अंधी दौड़ के बीच मनुष्य तथा प्रकृति के बदलते रिश्ते को केंद्र में रखता है। धरती, वृक्ष, नदी, पहाड़, हवा और पक्षी जैसे प्राकृतिक तत्वों को पात्रों के रूप में सामने लाकर प्रस्तुति यह सवाल उठाती है कि यदि प्रकृति की आवाज लगातार अनसुनी की जाती रही, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी दुनिया बचेगी।
इस प्रस्तुति की खासियत किशोर रंगकर्मियों की बड़ी भागीदारी है। मंच पर 25 कलाकार विभिन्न चरित्रों के माध्यम से पर्यावरण और मानवीय सरोकारों को अभिव्यक्त करेंगे। समृद्धि श्रेया और समर प्रताप सिंह सूत्रधार की भूमिका में हैं। प्रीति कुमारी धरती, अनुभव सिंह वृक्ष, शगुन सिंह पक्षी, आर्यन कुमार सिंह पहाड़, स्मृति गौतम हवा, रिया शर्मा नदी और युवराज सिंह विकास की भूमिका में हैं। विराट कुमार सिंह ग्रामीण, जज, काका एवं कोरस की भूमिकाएं निभाएंगे। वहीं राजन गुप्ता, श्रेया सिंह, अश्विनी सिंह, वंशिका और गरिमा कुमारी क्रमशः युवक, युवती, मां, बच्चा और महिला की भूमिकाओं में हैं।
कोरस में आदित्य कुमार गुप्ता, आकृति कुमारी वर्मा, खुशी कुमारी, आराध्या सिंह और श्रुति कुमारी शामिल हैं। सामाजिक पात्रों की भूमिकाओं के साथ संगीत पक्ष में हिमांशु कुमार राय (सिंथेसाइजर), शैलेन्द्र कुमार शाही (हारमोनियम), विनय कुमार ‘बीनू जी’ (नाल), मानिक कुमार (ड्रम) और आयुष कुमार मान (झाल/खंजड़ी) सहयोग करेंगे।
प्रस्तुति के सह-निर्देशक शैलेन्द्र कुमार शाही एवं शालिनी कुमारी हैं, जबकि सहायक संगीत निर्देशन विनय कुमार का है। लाइट, माइक एवं प्रॉप्स आयुष कुमार संभालेंगे। वेश-रूप सज्जा में आकृति कुमारी वर्मा, प्रीति कुमारी, समर प्रताप सिंह एवं विराट कुमार सिंह का सहयोग है। पूर्वाभ्यास प्रभारी बाबुआनन्द द्विवेदी हैं।
प्रस्तुति के प्रबंधन में डॉ. विकास सिंह, प्रबंध निदेशक, सीपीएस एवं शिव शंकर कुमार की भूमिका है। प्रस्तुति नियंत्रक के रूप में प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव, एमएलसी, सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, अध्यक्ष, इप्टा, डॉ0 मकेश्वर चौधरी, संरक्षक, डॉ0 शालिग्राम विश्वकर्मा तथा डॉ. हरेन्द्र सिंह, चेयरमैन, सीपीएस ग्रुप का मार्गदर्शन प्राप्त है।
‘द लास्ट क्राई’ की विशेषता यह भी है कि इसमें रंगमंच के माध्यम से पर्यावरण का सवाल सीधे युवा पीढ़ी की आवाज में उठाया गया है। अभिनय, संगीत और सामूहिक रंगभाषा के जरिए यह प्रस्तुति दर्शकों को केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश नहीं देती, बल्कि उनसे यह असहज सवाल भी करती है कि प्रकृति के विनाश की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और उसकी कीमत आने वाली पीढ़ियां क्यों चुकाएं?
4 अक्टूबर : समापन और दो महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां
नाट्योत्सव के अंतिम दिन 4 अक्टूबर की शाम 6 बजे समापन सत्र आयोजित होगा। समापन अवसर पर पटना इप्टा द्वारा ‘सद्गति’ का मंचन किया जाएगा। इसकी कहानी प्रेमचंद की है, नाट्य रूपांतरण भीष्म साहनी का तथा निर्देशन दीपक कुमार का है।
इसके बाद कटिहार इप्टा की प्रस्तुति ‘सुन्दर’ होगी, जिसके लेखक एवं निर्देशक मुकेश कुमार मोनी हैं।
रंग चबूतरा : मंच के बाहर भी रंगों की हलचल
नाट्योत्सव के दौरान 3 और 4 अक्टूबर की शाम 5 बजे ‘रंग चबूतरा’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें छपरा, बिहट, भागलपुर, पटना और सहरसा इप्टा की इकाइयों द्वारा जनगीत-संगीत, नृत्य, लघु नाटक आदि की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इस आयोजन का उद्देश्य रंगमंच को पारंपरिक मंच की सीमाओं से निकालकर आम लोगों के बीच ले जाना भी होगा।
‘वर्तमान हिन्दी रंगमंच और परंपरा’ पर होगा गंभीर रंग विमर्श
3 अक्टूबर की सुबह 10 बजे प्रमंडलीय पुस्तकालय सभाकक्ष, सहरसा में ‘वर्तमान हिन्दी रंगमंच और परंपरा का मूल्यांकन’ विषय पर रंग विमर्श आयोजित होगा। इसकी अध्यक्षता शिक्षाविद् प्रो. तरुण कुमार करेंगे और विषय प्रवर्तन डॉ. दीपक कुमार गुप्ता करेंगे।
विमर्श में डॉ. अमित रंजन, रितेश रंजन और नीरज कुमार रंजन वक्ता के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम का संचालन इंद्र भूषण रमण ‘बमबम’ करेंगे।
‘थिएटर की बातें : इप्टा के संग’ में युवाओं से रंग संवाद
4 अक्टूबर की सुबह 10 बजे प्रमंडलीय पुस्तकालय सभाकक्ष में ‘थिएटर की बातें : इप्टा के संग’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें सहरसा के रंगमंच में रुचि रखने वाले युवाओं के साथ रंग संवाद किया जाएगा।
इस संवाद में रितेश रंजन और संजय कुमार सिन्हा सहयोग करेंगे। कार्यक्रम में एस.एस. हिमांशु और दीपक कुमार भी सहयोगी के रूप में शामिल रहेंगे।
बाढ़ पीड़ितों के लिए इप्टा की संवेदना और सहयोग की अपील
बिहार इप्टा राज्य परिषद ने राज्य के विभिन्न जिलों में विनाशकारी बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। परिषद ने प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए नागरिकों से राहत कार्यों में आगे बढ़कर सहयोग करने तथा सरकार एवं विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों में यथासंभव योगदान देने की अपील की है।



