सारण प्रमण्डल के 79 रंग पुरोधाओं को सामूहिक नमन, ‘रश्मिरथी’ और ‘भीष्म : एक योद्धा’ ने बांधा समां”
छपरा, 11 जून 2026। वरिष्ठ रंगकर्मी, फिल्मकार एवं अधिवक्ता स्वर्गीय बिपिन बिहारी श्रीवास्तव के जन्मदिवस के अवसर पर भिखारी ठाकुर प्रेक्षागृह, छपरा में मंगलवार को आयोजित “बिपिन बिहारी श्रीवास्तव नाट्योत्सव 2026” श्रद्धा, स्मृति और रंग-सृजन का अद्वितीय संगम बन गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बिपिन बिहारी श्रीवास्तव सहित सारण प्रमंडल के 78 दिवंगत रंग पुरोधाओं को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सभा की अध्यक्षता विधान परिषद सदस्य प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव ने की। मुख्य अतिथियों में एसीजेएम सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) श्री राजीव कुमार, बिपिन बिहारी श्रीवास्तव के अनुज और पूर्व अपर सचिव सामान्य प्रशासन आनन्द बिहारी प्रसाद,वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. लाल बाबू यादव, बिहार इप्टा की ताप्ति वर्मा, सुरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, शैलेन्द्र कुमार शाही, उनके परिजन – ज्योति श्रीवास्तव, कंचन बाला, अंचल अप्रतिम, विभावरी, प्रशांत चेतन, प्रेमलता, क्षितिज समीर, सुमन श्रीवास्तव, कौस्तुभ निहाल, संभव संदर्भ, स्नेह, मोहित, रिया राज, आस्था, अंशुमन समीर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वक्ताओं ने स्वर्गीय बिपिन बिहारी श्रीवास्तव के रंगकर्म, सांस्कृतिक योगदान और सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही सारण प्रमंडल के दिवंगत रंगकर्मियों को सामूहिक श्रद्धांजलि देने की नई परंपरा स्थापित करने के लिए आयोजक डॉ. अमित रंजन की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन प्रो. शकील अनवर और डॉ0 अमित रंजन ने किया।
द्वितीय सत्र में शाम 6 बजे से आयोजित “रंग श्रद्धांजलि” का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पुनीत कुमार गर्ग ने किया। इस अवसर पर छपरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि रंजन प्रसाद सिंह, लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा, रंगकर्मी पशुपति नाथ अरुण, डॉ. लाल बाबू यादव सहित अनेक साहित्यकार, कलाकार एवं रंगप्रेमी उपस्थित थे।
रंग श्रद्धांजलि की शुरुआत स्वर्गीय बिपिन बिहारी श्रीवास्तव रचित गीत “बटोहिया रे कांहे बिसरवले मोरा” गांव पर वंडर गर्ल आराध्या अभिनव के भावपूर्ण नृत्य से हुई, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस गीत का स्वर और संगीत कंचन बाला का रहा।
इसके उपरांत युद्ध की विभीषिका के विरुद्ध शांति, अमन और मानवता के संदेश को केंद्र में रखकर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की अमर कृति “रश्मिरथी” का प्रभावशाली मंचन प्रस्तुत किया गया। नाट्यांतरण, निर्देशन एवं रंग परिकल्पना डॉ. अमित रंजन की थी, जबकि संगीत संयोजन कंचन बाला एवं टुन्नू तनहा ने किया।
नाटक “रश्मिरथी” : कलाकार
डॉ. मनोरंजन पाठक (कर्ण)
नाटक के केंद्रीय पात्र कर्ण के रूप में डॉ. मनोरंजन पाठक ने अत्यंत प्रभावशाली अभिनय किया। उनके संवादों में आत्मसम्मान, दानवीरता और अंतर्द्वंद्व की पीड़ा सजीव होकर उभरी। मंच पर उनकी उपस्थिति ने कर्ण के व्यक्तित्व की गरिमा को पूर्णतः अभिव्यक्त किया।
डॉ. अमित रंजन (कृष्ण)
कृष्ण की भूमिका में डॉ. अमित रंजन ने अपनी संवाद-अभिव्यक्ति, मुख-मुद्राओं और संतुलित अभिनय से पात्र की कूटनीतिक बुद्धिमत्ता एवं आध्यात्मिक आभा को सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया। कर्ण-कृष्ण संवाद नाटक के प्रमुख आकर्षणों में रहा।
डॉ. प्रशांत चेतन (परशुराम)
पहली प्रस्तुति में अपने पिता द्वारा निभाई गई भूमिका को उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए परशुराम रूप में डॉ. प्रशांत चेतन ने गुरु की कठोरता, तपस्या और शाप देने की भाव-भंगिमा को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। उनका अभिनय गंभीर और प्रभावोत्पादक रहा।
कंचन बाला (कुंती)
कुंती की भूमिका में कंचन बाला ने मातृत्व, करुणा और अपराधबोध के भावों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। कर्ण के साथ उनके दृश्य भावनात्मक रूप से दर्शकों को स्पर्श करने में सफल रहे।
शैलेन्द्र कुमार शाही (इन्द्र)
इन्द्र के रूप में शैलेन्द्र कुमार शाही ने पात्र की चतुराई और उद्देश्यपूर्ण व्यवहार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनका अभिनय कथानक को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
डॉ. अभिलाषा मिश्रा (समय)
‘समय’ जैसे प्रतीकात्मक पात्र में डॉ. अभिलाषा मिश्रा ने अपनी वाणी और मंच-संचालन क्षमता से नाटक को दार्शनिक गहराई प्रदान की। उनकी प्रस्तुति ने कथा के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावी रूप से जोड़ा।
आयुषी परासर (नटी)
नटी की भूमिका में आयुषी परासर ने मंच पर सहजता, ऊर्जा और आकर्षक अभिव्यक्ति का परिचय दिया। उनकी प्रस्तुति ने नाटक को जीवंतता और गति प्रदान की।
पंकज कुमार (दुर्योधन)
दुर्योधन के रूप में पंकज कुमार ने आत्मविश्वास, मित्रता और सत्ता-अहंकार के मिश्रित भावों को सफलतापूर्वक अभिव्यक्त किया। कर्ण के प्रति उनकी निष्ठा विशेष रूप से प्रभावशाली रही।
अमितेश (भीम)
भीम की भूमिका में अमितेश ने वीरता, आक्रोश और युद्धभावना का सशक्त प्रदर्शन किया। उनकी मंचीय उपस्थिति प्रभावशाली और ऊर्जावान रही।
शशांक सौरभ (अर्जुन)
अर्जुन के रूप में शशांक सौरभ ने संयमित अभिनय और प्रभावी संवाद-अदायगी के माध्यम से पात्र की वीरता और नैतिक द्वंद्व को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया।
कोरस दल
शालिनी, नंदनी, श्रुति गुप्ता, आशीष कुमार सिंह, युद्ध प्रताप तिवारी, अमित भारद्वाज तथा अन्य कलाकारों ने कोरस के माध्यम से नाटक के भाव, वातावरण और नाटकीय प्रभाव को सशक्त बनाया। सामूहिक प्रस्तुति में उनका तालमेल, अनुशासन और भावाभिव्यक्ति सराहनीय रही।
“रश्मिरथी” की प्रस्तुति में सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों के साथ न्याय किया। अभिनय, संवाद-अभिव्यक्ति, भाव-प्रस्तुति और सामूहिक समन्वय के कारण नाटक दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ने में सफल रहा। विशेष रूप से कर्ण, कृष्ण और कुंती के दृश्य तथा कोरस की सहभागिता ने प्रस्तुति को भावनात्मक और कलात्मक ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम के अगले चरण में रिया राज द्वारा प्रस्तुत मनभावन नृत्य ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
इसके बाद बिहार सिनेमा एवं सांस्कृतिक समिति, गोपालगंज की द्वारा “भीष्म : एक योद्धा” नाटक का सफल मंचन किया। नाटक के लेखक धनंजय चौबे तथा निर्देशक अनिकेत मिश्रा थे तो संगीत संतोष सुमन ने दिया। श्री कृष्ण- अनूप शंभूनाथ, गंगा- कंचन बाला,
भीष्म- धनंजय चौबे, दुर्योधन- राजू बाबा, कर्ण- कुंज श्रीवास्तव, शकुनी- अजेंद्र पाण्डेय/आमोद गुप्ता, दुशासन- टी टी बाबा, द्रोणाचार्य- राजेश सिंह, कृपाचार्य – राजू पाठक, युधिष्ठिर- सागर पटेल, अर्जुन- शशांक सौरभ, अभिमन्यु- बैजू पासवान, धृष्टद्युम्न- अनूप कुमार सुमन, शिखंडी – अभिषेक दुबे, विदुर- राजेश कुमार सिंह आदि की सशक्त प्रस्तुति और प्रभावी निर्देशन ने दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।
पूरे आयोजन ने न केवल स्वर्गीय बिपिन बिहारी श्रीवास्तव को सच्ची रंग-श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि सारण की समृद्ध रंगपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा प्रदान की।



