HomeLaw & Justiceइंसाफ: हत्या कांड में 4 दोषियों को आजीवन कारावास, ₹25-25 हजार जुर्माना

इंसाफ: हत्या कांड में 4 दोषियों को आजीवन कारावास, ₹25-25 हजार जुर्माना

सारण जिले में हत्या के एक पुराने और गंभीर मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला दिनांक 28 फरवरी 2026 को विद्वान न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-12 श्री अंजनी कुमार गोंड द्वारा सुनाया गया।

छपरा 28 फरवरी 2026।  सारण जिले में हत्या के एक पुराने और गंभीर मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला दिनांक 28 फरवरी 2026 को विद्वान न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-12 श्री अंजनी कुमार गोंड द्वारा सुनाया गया।

क्या है मामला?

यह मामला मढ़ौरा थाना कांड संख्या-28/07, दिनांक 05.02.2007 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 323, 324, 307 एवं 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह सत्रवाद संख्या-600/2007 के रूप में विचाराधीन था।

करीब 19 वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने धारा 302/149 भा.द.वि. के तहत चारों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक को ₹25,000 का अर्थदंड की सजा सुनाई है।

साथ ही, यदि कोई अभियुक्त अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है तो उसे 06 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

सजायाफ्ता अभियुक्त

  1. रविन्द्र सिंह, पिता – धर्मनाथ सिंह, निवासी – मोथहों, थाना – मढ़ौरा, जिला – सारण
  2. विजय सिंह, पिता – धर्मनाथ सिंह, निवासी – मोथहाँ, थाना – मढ़ौरा, जिला – सारण
  3. सुबास सिंह, पिता – धर्मनाथ सिंह, निवासी – मोथहों, थाना – मढ़ौरा, जिला – सारण
  4. गुड्डु सिंह, पिता – धर्मनाथ सिंह, निवासी – मोथहाँ, थाना – मढ़ौरा, जिला – सारण

अभियोजन की मजबूत पैरवी

इस मामले में अनुसंधानकर्ता द्वारा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान कर चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से डॉक्टर एवं अनुसंधानकर्ता सहित कुल 06 साक्षियों की गवाही कराई गई।

अपर लोक अभियोजक श्री विमल चन्द्र सिंह ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए दोषसिद्धि सुनिश्चित कराई।

गंभीर अपराधों पर फोकस

पुलिस मुख्यालय के निर्देश के आलोक में वर्ष 2026 में सारण जिले में गंभीर अपराधों को चिन्हित कर त्वरित विचारण सुनिश्चित किया जा रहा है। साक्षियों की समय पर उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के माध्यम से पुलिस ऐसे मामलों में सजा दिलाने के लिए सतत प्रयासरत है।

इस फैसले से न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि गंभीर अपराधों में कानून की पकड़ से कोई बच नहीं सकता।

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