छपरा: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती और पुलिस की मुस्तैदी ने बिहार के सारण में चल रहे एक बड़े शोषण नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। रिविलगंज और कोपा थाना क्षेत्रों में संचालित आर्केस्ट्रा समूहों पर की गई अचानक छापेमारी में पुलिस ने 15 नाबालिग लड़कियों को नरक से बाहर निकाला है। इन बालिकाओं को नृत्य के नाम पर प्रताड़ित कर जबरन काम कराया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में तस्करी से जुड़े 7 मुख्य आरोपियों को भी सलाखें के पीछे भेज दिया है।
प्रियंक कानूनगो, सदस्य-राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पत्र के आलोक में वरीय पुलिस अधीक्षक, सारण के निर्देशानुसार महिला थाना पुलिस टीम ने रिविलगंज एवं कोपा थानाक्षेत्र में संचालित विभिन्न आर्केस्ट्रा समूहों के विरुद्ध सुनियोजित घेराबंदी कर व्यापक छापामारी अभियान चलाया। इस प्रभावी कार्रवाई में जबरन प्रताड़ित कर नृत्य कराने हेतु मजबूर की जा रही 15 नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया।
मुक्त कराई गई बालिकाओं में उत्तर प्रदेश से 1, असम से 1, पंजाब से 4, पश्चिम बंगाल से 4, बिहार से 3 तथा ओडिशा से 2 शामिल हैं। सभी को आवश्यक काउंसलिंग एवं विधिक संरक्षण की प्रक्रिया के तहत सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। इस संबंध में महिला थाना कांड सं. 11/26, दिनांक 12.02.2026 दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
7 अभियुक्त गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मानव तस्करी एवं बाल शोषण से जुड़े 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में दीपक कुमार यादव, हरिशंकर मांझी, संजीत कुमार मांझी, गोविन्द कुमार यादव, संदीप यादव, विनय ठाकुर एवं मोहित कुमार शामिल हैं। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी जारी है।
2024 से अब तक 316 लड़कियाँ मुक्त
वरीय पुलिस अधीक्षक, सारण के नेतृत्व में मई 2024 से अब तक जिले में चलाए गए विशेष अभियानों के तहत कुल 316 लड़कियों को अनैतिक देह व्यापार से मुक्त कराया गया है। इस दौरान 39 कांड दर्ज कर 105 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस प्रशासन द्वारा मानव तस्करी के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत निरंतर कार्रवाई की जा रही है।
संयुक्त अभियान की मिसाल
इस विशेष अभियान में महिला थाना पुलिस के साथ-साथ ए.एच.टी.यू. सारण, मिशन मुक्ति फाउंडेशन, रेस्क्यू फाउंडेशन (दिल्ली), नारायणी सेवा संस्थान (सारण) एवं रेस्क्यू एंड रिलीफ फाउंडेशन (पश्चिम बंगाल) के सदस्यों ने समन्वित भूमिका निभाई। पुलिस और सामाजिक संस्थाओं के इस तालमेल को मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह कार्रवाई न केवल कानून-व्यवस्था की सुदृढ़ता का प्रमाण है, बल्कि समाज में नाबालिगों की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर



