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हे राम…! बापू को बिहारी जन का सलाम- गांधी शहादत दिवस पर पटना में दो मिनट का मौन सत्याग्रह और सांस्कृतिक कार्यक्रम

डॉ. प्रो. अनीता सिंह ने “बापू और आज की प्रासंगिकता” विषय पर बोलते हुए कहा कि बापू को भुलाया नहीं जा सकता और न ही उनके विचारों को मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा— “शरीर मारा जा सकता है, विचार नहीं। आज के समय में अगर हत्यारों को महिमामंडित किया जा रहा है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। बापू केवल नोटों, गलियों और सड़कों तक सीमित नहीं होने चाहिए, उनके विचारों को अमल में लाकर ही उन्हें जीवित रखा जा सकता है।”

पटना, 30 जनवरी 2026। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 78वें शहादत दिवस के अवसर पर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) पटना द्वारा भिखारी ठाकुर रंगभूमि, गांधी मैदान में दो मिनट का मौन सत्याग्रह एवं भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ठीक 11 बजे सायरन बजते ही दो मिनट के मौन से हुई, जिसके उपरांत उपस्थित कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बापू के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम का आरंभ गांधी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” से हुआ। इसके बाद श्वेत प्रीति द्वारा “वैष्णव जन तो तेने कहिए” का भावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया गया, जिसने वातावरण को भावुक और संकल्पशील बना दिया।

मुख्य वक्ता डॉ. प्रो. अनीता सिंह ने “बापू और आज की प्रासंगिकता” विषय पर बोलते हुए कहा कि बापू को भुलाया नहीं जा सकता और न ही उनके विचारों को मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा— “शरीर मारा जा सकता है, विचार नहीं। आज के समय में अगर हत्यारों को महिमामंडित किया जा रहा है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। बापू केवल नोटों, गलियों और सड़कों तक सीमित नहीं होने चाहिए, उनके विचारों को अमल में लाकर ही उन्हें जीवित रखा जा सकता है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के क्रम में पटना इप्टा के रंगकर्मी रंजीत कुमार ने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना “बापू” और “कलम आज उनकी जय बोल” का प्रभावशाली पाठ किया। जन संस्कृति मंच के राजन कुमार द्वारा “हमारे वतन की नई जिंदगी हो” तथा “एक दिन राजा मरते आसमान में उड़ता मैना” का गायन किया गया।
दलित अधिकार मंच के कपिलेश्वर राम ने “गांधी और दलित” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि दलितों का विकास ही समाज और देश का विकास है; जाति-भेद पर आधारित व्यवस्था कभी प्रगति नहीं कर सकती।

इसके बाद शाकिब खान ने भवानी प्रसाद मिश्र की कविता “वो नंगा ही तो था” का सशक्त पाठ किया। श्वेत प्रीति, पीयूष सिंह, संजय कुमार, उज्ज्वल कुमार और सौरभ राज ने “तू खुद तो बदल”, “हम हैं इसके मालिक”, “तीन कठिया नील खरीदी” और “तू जिंदा है” जैसे गीतों की प्रस्तुति दी।

केदार वेलफेयर ट्रस्ट के विशाल तिवारी ने “चार कोप उर्फ चार हो” तथा ओम प्रकाश आदित्य की कविता “इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं” का पाठ किया।

कार्यक्रम के अंत में इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव तनवीर अख्तर ने धन्यवाद ज्ञापन किया और “हम होंगे कामयाब” गीत के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन विशाल तिवारी ने किया।

इसी क्रम में इप्टा एवं अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों द्वारा डाकबंगला चौराहा पर भी दो मिनट का मौन सत्याग्रह और गांधी भजनों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में डॉ. अंकित, विजयकांत, प्रेम कुमार, जितेंद्र कुमार, रविरंजन, ऋत्विज कुमार सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आयोजन में इप्टा, लोक परिषद, दलित अधिकार मंच, केदार वेलफेयर ट्रस्ट, असंगठित कामगार यूनियन और जन संस्कृति मंच सहित कई सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों का सक्रिय सहयोग रहा। ये जानकारी पटना इप्टा के सचिव पीयूष सिंह ने दी।

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