कुछ अधिकारी अपने पद से पहचाने जाते हैं, और कुछ अपने कार्य से। डॉ. कुमार आशीष, IPS ऐसे ही नेतृत्वकर्ता रहे, जिनका बीते 19 महीनों (01 जून 2024 से 31 दिसंबर 2025) का कार्यकाल सारण पुलिस के इतिहास में सख़्ती, संवेदना और संरचनात्मक सुधार का स्वर्णिम अध्याय बनकर दर्ज हो गया। अब उनके पुलिस उप-महानिरीक्षक, सहरसा के पद पर स्थानांतरण के साथ सारण एक ऐसे प्रहरी को विदा कर रहा है, जिसने “जीरो टॉलरेंस” को केवल नीति नहीं, बल्कि परिणामों की संस्कृति बनाया।
उनके कुशल नेतृत्व में सारण पुलिस ने 23,612 अभियुक्तों की गिरफ्तारी, हजारों वारंट-सम्मन का निष्पादन और संगठित अपराध पर निर्णायक चोट के साथ कानून का इक़बाल बुलंद किया। हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, पॉक्सो और अपहरण जैसे संगीन अपराधों पर कठोर कार्रवाई ने अपराधियों को स्पष्ट संदेश दिया—सारण में अपराध की कोई जगह नहीं।
रसूलपुर तिहरा हत्याकांड: न्याय की रफ़्तार का राष्ट्रीय उदाहरण
डॉ. कुमार आशीष के कार्यकाल की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में रसूलपुर तिहरा हत्याकांड मील का पत्थर बनकर उभरा। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत महज 50 दिनों में दोषियों को आजीवन कारावास एवं ₹25,000 जुर्माना—यह भारत में अपनी तरह की पहली सजा थी। यह केवल एक केस का निस्तारण नहीं, बल्कि त्वरित न्याय, सशक्त जांच और अभियोजन के समन्वय की मिसाल बनी। भुवनेश्वर में आयोजित 59वें डीजीपी–आईजीपी सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष इस केस का प्रस्तुतिकरण—सारण और बिहार पुलिस के बढ़ते राष्ट्रीय सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।
अपराध के ग्राफ में ऐतिहासिक गिरावट
रणनीतिक पुलिसिंग और सतत निगरानी के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में लूट में 50%, डकैती में 33%, सामान्य दंगों में 78%, भीषण दंगों में 50%, चोरी में 22% और हत्या में 15% की कमी दर्ज हुई—ये आँकड़े सारण की बदली हुई सुरक्षा तस्वीर को स्पष्ट करते हैं।
अवैध गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार
मद्यनिषेध और अवैध खनन के विरुद्ध जल-थल दोनों मार्गों पर अभूतपूर्व कार्रवाई हुई—2,92,422 लीटर अवैध शराब की बरामदगी, 5,423 भट्टियों का ध्वस्तीकरण, 17,96,081 लीटर अर्द्धनिर्मित शराब का विनष्टीकरण, तथा 9.08 लाख CFT बालू की जब्ती के साथ ₹1,527.08 लाख का अर्थदंड। यह प्रशासनिक दृढ़ता का ठोस प्रमाण रहा।
“आवाज़ दो”: जब पुलिस बनी उम्मीद
डॉ. कुमार आशीष की पुलिसिंग की आत्मा संवेदना थी। महिला सुरक्षा के लिए संचालित “आवाज़ दो” अभियान के माध्यम से 817 महिलाओं को सहायता, 289 बालिकाओं को अनैतिक देह व्यापार से मुक्ति और 413 अपहृत बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी—यह अभियान केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि आवाज़ देने का साहस बना।
इसी मानवीय पहल से प्रेरित होकर बनी शॉर्ट फ़िल्म “अंधेरे में एक किरण”—जो बताती है कि जब व्यवस्था संवेदनशील हो, तो अंधकार में भी उम्मीद की रोशनी जलती है। यह फ़िल्म “आवाज़ दो” की भावना को समाज तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी और सारण पुलिस की मानवीय छवि को नई पहचान दी।
न्याय, निवारण और आधुनिक पुलिसिंग
6,392 कांडों में दोषसिद्धि, 7,801 अभियुक्तों को सजा, कुख्यात अपराधियों के विरुद्ध मुठभेड़ों में गिरफ्तारी, CCA/BNSS के तहत कठोर निवारक कार्रवाई, सुपर पेट्रोलिंग, बीट पुलिसिंग, ऑपरेशन त्रिनेत्र और ERSS-112—इन सभी ने पुलिस को अधिक आधुनिक, तेज़ और भरोसेमंद बनाया।
आज, जब डॉ. कुमार आशीष, IPS सहरसा के लिए विदा हो रहे हैं, सारण उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद रखेगा, जिसने कानून का इक़बाल भी बुलंद किया और करुणा की लौ भी जलाए रखी।
उन्होंने सारण को केवल सुरक्षित नहीं बनाया, बल्कि न्यायपूर्ण, संवेदनशील और आत्मविश्वासी बनाया।
सादर विदाई, सर—आपकी विरासत सारण की हर सुरक्षित सुबह और हर निडर आवाज़ में सुरक्षित रहेगी।



