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सारण का बेटा, विज्ञान का सितारा: डॉ० शिवेंदु रंजन का INYAS में चयन, देश-दुनिया में गूंजा बिहार का नाम

बिहार के लिए यह पल गर्व, गौरव और इतिहास रचने वाला है। सारण जिले के अमनौर प्रखंड स्थित सलखुआ गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत में चमक बिखेर रहे डॉ. शिवेंदु रंजन का चयन वर्ष 2026 बैच के लिए इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंस (INYAS) के सदस्य के रूप में हुआ है। यह सम्मान केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बिहार, विशेषकर ग्रामीण भारत की प्रतिभा की राष्ट्रीय मुहर है।

सलखुआ से सिलिकॉन वैली तक: बिहार का नाम रोशन!

छपरा 02 जनवरी 2026। बिहार के लिए यह पल गर्व, गौरव और इतिहास रचने वाला है। सारण जिले के अमनौर प्रखंड स्थित सलखुआ गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत में चमक बिखेर रहे डॉ. शिवेंदु रंजन का चयन वर्ष 2026 बैच के लिए इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंस (INYAS) के सदस्य के रूप में हुआ है। यह सम्मान केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बिहार, विशेषकर ग्रामीण भारत की प्रतिभा की राष्ट्रीय मुहर है।

ग्रामीण मिट्टी से निकला वैश्विक वैज्ञानिक

अधिवक्ता रवि रंजन प्रसाद सिंह एवं शिक्षिका माधुरी सिंह के पुत्र डॉ. शिवेंदु रंजन आज देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर के स्कूल ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनका शोध बायोमटेरियल, नैनोमेडिसिन और ट्रांसलेशनल नैनोटेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के विज्ञान पर केंद्रित है, जिसका सीधा लाभ मानव स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा है।

INYAS: चुनिंदा 20 में जगह, पांच साल का गौरव

INYAS, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के संरक्षण में कार्यरत भारत की आधिकारिक युवा विज्ञान अकादमी है। वर्ष 2014 में स्थापित इस प्रतिष्ठित मंच पर हर साल देशभर से केवल 20 असाधारण युवा वैज्ञानिकों का चयन किया जाता है, जिन्हें पांच वर्षों के लिए सदस्यता दी जाती है। यह संस्था ग्लोबल यंग एकेडमी से भी संबद्ध है और भारत के युवा वैज्ञानिकों की आवाज़ मानी जाती है।

नैनो-बायो रिसर्च लैब से समाज तक विज्ञान

IIT खड़गपुर में डॉ. रंजन नैनो-बायो रिसर्च लैब का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां जीन व इम्यून डिलीवरी, रीजेनरेटिव मेडिसिन, नैनो-बायो इंटरैक्शन, सस्टेनेबल नैनोटेक्नोलॉजी, नैनोसेंसर, क्वांटम मैटेरियल और नैनोफर्टिलाइज़र जैसे अत्याधुनिक विषयों पर अनुसंधान हो रहा है। उनका लक्ष्य स्पष्ट है—प्रयोगशाला से सीधे मरीज और समाज तक तकनीक पहुंचाना

सरकारी भरोसा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग

डॉ. रंजन को ICMR और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार से महत्वपूर्ण अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुए हैं। इनमें बायोएब्जॉर्बेबल ड्रग-एल्यूटिंग कार्डियोवैस्कुलर स्टेंट और गंभीर जलन के घावों के लिए माइक्रोनीडल-हाइड्रोजेल पैच जैसे जीवनरक्षक नवाचार शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से वे जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (USA) के साथ अंतरराष्ट्रीय परियोजना पर भी काम कर रहे हैं।

शोध, संपादन और पेटेंट—तीनों में अव्वल

डॉ. शिवेंदु रंजन के शोध पत्रों को देश-विदेश में व्यापक मान्यता और उद्धरण मिले हैं। वे Springer Nature के प्रतिष्ठित जर्नल्स Environmental Chemistry Letters और Discover Nano के एसोसिएट एडिटर भी हैं।
इनोवेशन की बात करें तो वे हाई-थ्रूपुट इलेक्ट्रोस्पिनिंग नोज़ल के सह-आविष्कारक हैं और IIT खड़गपुर से एक्ने पैच, नैनोफर्टिलाइज़र, कार्बन क्वांटम डॉट्स और ड्रग को-डिलीवरी से जुड़े चार पेटेंट फाइल कर चुके हैं।

बिहार के युवाओं के लिए उम्मीद की किरण

डॉ. शिवेंदु रंजन का INYAS में चयन यह संदेश देता है कि गांव की गलियों से भी वैश्विक विज्ञान का नेतृत्व किया जा सकता है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और संस्थान, बल्कि पूरे बिहार और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है—कि संकल्प, शिक्षा और नवाचार के बल पर कोई भी शिखर दूर नहीं।

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