छपरा के मढ़ौरा प्रखंड के जवईनिया गाँव में मानवीय संवेदना, साहस और सामाजिक बदलाव की एक मार्मिक मिसाल सामने आई है। यहाँ दो बेटियों ने न केवल ‘भाई न होने’ की कथित कमी को तोड़ा, बल्कि अपनी दिवंगत माँ की अर्थी को कंधा देकर और मुख्याग्नि देकर समाज की रूढ़ मान्यताओं को भी चुनौती दी।
यह घटना किसी पूर्व नियोजित निर्णय का परिणाम नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिया गया साहसी कदम थी। माँ के निधन के समय घर के सभी पुरुष सदस्य रोज़गार के सिलसिले में दूसरे प्रदेशों में थे और उनके लौटने में समय लग सकता था। घर में माँ का पार्थिव शरीर पड़ा था और परिवार अनिर्णय की स्थिति में था। ऐसे कठिन क्षण में नानी के मार्गदर्शन पर बेटियाँ—मौसम और रौशन—आगे आईं और जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।
दोनों बेटियों ने अपनी माँ की अर्थी को कंधा दिया और शव यात्रा के साथ रिविलगंज सिमरिया घाट पहुँचीं। वहाँ बड़ी बेटी मौसम कुमारी ने ग्रामीणों की मौजूदगी में माँ को मुख्याग्नि देकर अंतिम संस्कार संपन्न कराया। यह दृश्य न केवल भावुक कर देने वाला था, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश भी छोड़ गया—कि संस्कार और कर्तव्य बेटा-बेटी के भेद से नहीं, जिम्मेदारी और संवेदना से तय होते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, घर में पुरुष सदस्य न होने की स्थिति में नानी ने बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद मौसम और रौशन ने बिना किसी झिझक के परंपरागत जिम्मेदारियाँ निभाईं। शव यात्रा में आसपास के पटिदार और ग्रामीण भी शामिल हुए, जिन्होंने बेटियों के साहस की सराहना की।
परिवार के सदस्य बाद में पहुँच गए और श्राद्ध संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई। दिवंगत महिला के देवर दिनेश सिंह ने बताया कि वे चार भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं। तीसरे भाई रविश कुमार सेना में जम्मू बॉर्डर पर तैनात हैं, जबकि चौथे भाई राजस्थान में थे। घटना के समय कोई भी पुरुष सदस्य घर पर मौजूद नहीं था। ऐसे में बेटियों द्वारा उठाया गया कदम वास्तव में साहस और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
बेटी मौसम ने सहज शब्दों में कहा, “अब परिवार के लोग आ गए हैं। गुरुवार को उतरी लेकर श्राद्ध संस्कार की जिम्मेदारी परिवार ने संभाल ली है।”
जवाईनिया गाँव की यह घटना बदलते सामाजिक परिवेश की सशक्त तस्वीर पेश करती है—जहाँ बेटियाँ न केवल घर संभाल रही हैं, बल्कि परंपराओं की नई व्याख्या भी कर रही हैं। यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
By: Rajeev Kumar



