छपरा 31 जनवरी 2026। सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों को निजी नर्सिंग होम, निजी जांच घर और दवा दुकानों की ओर मोड़ने वाले तत्वों पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। स्वास्थ्य विभाग, बिहार के सचिव द्वारा पत्रांक 122(12), दिनांक 27.01.2026 के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के परिसरों में निजी नर्सिंग होम, निजी जांच घर/एक्स-रे केंद्र एवं निजी दवा प्रतिष्ठानों से जुड़े कर्मी मरीजों को गुमराह कर सरकारी सुविधाओं से वंचित कर रहे हैं। यह न केवल आम जनता के अधिकारों का हनन है, बल्कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गंभीर बाधा है।
विभागीय निदेश के आलोक में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के आदेश पर सारण जिले के विभिन्न सरकारी चिकित्सा संस्थानों की सघन जांच के लिए जिला एवं अनुमंडल स्तर के कुल 23 संयुक्त जांच दलों का गठन किया गया है। प्रत्येक जांच दल को अपने-अपने संबद्ध अस्पताल का प्रत्येक बुधवार और शनिवार को नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।
इसी क्रम में आज शनिवार, 31 जनवरी को सभी 23 जांच दलों ने जिले के विभिन्न सरकारी चिकित्सा संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुई इस कार्रवाई से अस्पताल परिसरों में हड़कंप की स्थिति देखी गई। निरीक्षण के दौरान अस्पताल व्यवस्था, मरीजों की सुविधा, बाहरी तत्वों की भूमिका तथा कर्मियों की कार्यशैली की गहन पड़ताल की गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों एवं अनियमितताओं से संबंधित जांच प्रतिवेदन उसी दिन समर्पित किया जाए। प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार के लिए जहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, वहीं दोषी पाए गए निजी व्यक्तियों एवं संलिप्त सरकारी कर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन की इस सख्त पहल से साफ संदेश है—
सरकारी अस्पताल अब निजी धंधों के अड्डे नहीं बनेंगे, मरीजों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा।



