सरकार का वादा, बैंककर्मियों का सब्र टूटा, पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह पर टकराव तेज
पटना 30 दिसम्बर 2025। सरकार से किए गए वादे के पालन की माँग को लेकर बैंककर्मियों का आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन के तहत मंगलवार शाम 5:30 बजे भारतीय स्टेट बैंक, मुख्य शाखा, पश्चिमी गांधी मैदान के समीप बैंककर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पटना में 800 से अधिक बैंककर्मियों ने एक स्वर में “पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह” लागू करने की माँग को लेकर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
यह प्रदर्शन देश के सभी राज्यों, शहरों और ज़िलों में एक साथ आयोजित किया गया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 23 दिसंबर 2025 को भी देश की सभी राजधानियों में प्रदर्शन हुआ था, जिसमें अकेले पटना में 500 से अधिक बैंककर्मियों ने भाग लिया था।
AIBOC के सचिव अमरेश विक्रमादित्य ने बताया कि आंदोलन चरणबद्ध तरीके से तेज किया जा रहा है। इसके तहत 9 और 12 दिसंबर को देशभर के बैंककर्मियों ने माननीय वित्त मंत्री एवं IBA अध्यक्ष को ज्ञापन भेजा, 16 दिसंबर को बैज पहनकर विरोध दर्ज कराया गया, तथा संगोष्ठी और कार्यशालाओं के माध्यम से आंदोलन को धार दी गई। अगला चरण 4 जनवरी 2026 को देशव्यापी “X (ट्विटर) अभियान” होगा, 5 जनवरी को सभी राजधानियों में धरना दिया जाएगा और जनवरी 2026 के तीसरे सप्ताह में राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल प्रस्तावित है।
प्रदर्शन में UFBU से जुड़े सभी घटक—AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF, INBOC, NOBW एवं NOBO—के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। नेताओं ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि 8 मार्च 2024 को सरकार की सहमति से IBA और UFBU के बीच पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह को लागू करने का लिखित समझौता हुआ था, लेकिन 22 महीने बीत जाने के बाद भी इसे लागू न करना सरकार की दोहरी नीति और वादा-खिलाफी को उजागर करता है।
बैंककर्मियों ने कहा कि बढ़ते कार्य-दबाव, पारिवारिक जीवन के लिए समय की कमी, मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं को देखते हुए ही यह निर्णय लिया गया था, बावजूद इसके इसे जानबूझकर लंबित रखना बैंक कर्मचारियों के साथ अन्याय है। UFBU ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि इस अन्याय को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
800 से अधिक बैंककर्मियों ने एक सुर में सरकार से माँग की कि पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह को तत्काल लागू किया जाए, अन्यथा आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।



