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हिन्दी साहित्य का एक सजग स्वर मौन हुआ, प्रख्यात आलोचक-चिंतक वीरेन्द्र यादव का निधन, इप्टा ने व्यक्त की शोक संवेदना

हिन्दी साहित्य, विचार और जनसंस्कृति की दुनिया के लिए अत्यंत शोकपूर्ण है, प्रख्यात हिन्दी आलोचक, चिंतक और जनपक्षधर बुद्धिजीवी वीरेन्द्र यादव का लखनऊ में हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। उनके निधन से साहित्यिक जगत में एक ऐसी रिक्तता पैदा हो गई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं प्रतीत होती।

वीरेन्द्र यादव का जीवन केवल साहित्यिक आलोचना तक सीमित नहीं था, बल्कि वह व्यापक सामाजिक और राजनीतिक विमर्श से गहराई से जुड़ा रहा। वे जीवनपर्यन्त प्रगतिशील लेखक संघ से संबद्ध रहे और इसके राष्ट्रीय प्रेसीडियम के सक्रिय सदस्य के रूप में उन्होंने वैचारिक संघर्षों को दिशा दी। उनकी आलोचना दृष्टि सत्ता, वर्चस्व और समाज के अंतर्संबंधों को बेबाकी से उजागर करती रही। हस्तक्षेप विवाद नहीं, उपन्यास और वर्चस्व की शक्ति, हिंदी उपन्यास में सत्ता, उपन्यास और राष्ट्र तथा विमर्श और व्यक्तित्व जैसी कृतियाँ उनकी गहरी वैचारिक प्रतिबद्धता और आलोचनात्मक क्षमता की सशक्त साक्ष्य हैं।

राष्ट्रीय महासचिव तन्वीर अख़्तर ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वे एक ऐसे जन-आलोचक थे, जिन्होंने साहित्य को समाज से काटकर नहीं देखा, बल्कि उसे जनसंघर्षों और समय की चुनौतियों से जोड़कर समझा। उनका व्यक्तित्व सहज, संवादधर्मी और विचारोत्तेजक था, जो युवा रचनाकारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहा।

बिहार इप्टा के कार्यवाहक महासचिव फ़ीरोज़ अशरफ़ खां ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इप्टा के सांस्कृतिक आंदोलनों से उनका आत्मीय और सक्रिय जुड़ाव रहा। हाल ही में उन्होंने दिघवारा (सारण) में कविवर कन्हैया के जन्म-शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया था। वे बिहार इप्टा के राज्य सम्मेलन, ढाई आखर प्रेम: राष्ट्रीय सांस्कृतिक यात्रा तथा पटना में आयोजित इप्टा राष्ट्रीय प्लेटिनम जुबली समारोह में भी सहभागी बने और अपनी वैचारिक उपस्थिति से कार्यक्रमों को गरिमा प्रदान की।

बिहार इप्टा उनके निधन को हिन्दी साहित्य और जनसंस्कृति की अपूरणीय क्षति मानता है। उनके विचार, उनका संघर्ष और उनकी आलोचनात्मक चेतना आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती रहेगी।

बिहार इप्टा परिवार ने दिवंगत वीरेन्द्र यादव को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है तथा उनके शोकाकुल परिवार, मित्रों और सहयात्रियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
उनकी स्मृति, उनके विचारों और उनके संघर्षों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

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