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पछुआ हवा की मार, कोहरे की चादर: बिहार में सर्दी ने बदली रफ्तार, जनजीवन पर गहरा असर

मौसम विभाग का संकेत है कि आने वाले एक सप्ताह तक सर्दी से राहत मिलने के आसार कम हैं। ठंडी पछुआ हवा लगातार 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। साथ ही न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है। सुबह के समय घना कोहरा छाने से दृश्यता प्रभावित हो सकती है, जिससे सामान्य जनजीवन के साथ-साथ परिवहन पर भी असर पड़ने की आशंका है।

बिहार में सर्दी ने अब पूरी तरह अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। बीच-बीच में दिखी धूप की झलक ने जो थोड़ी राहत दी थी, वह अब बीते दिनों की बात हो गई है। शनिवार को ठंडी हवा और कनकनी ने सुबह से ही लोगों को सतर्क कर दिया। तापमान में आई गिरावट के साथ वातावरण में ठिठुरन साफ महसूस की गई—दिन का पारा लगभग 17 डिग्री और रात का तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। तेज़ पछुआ हवा ने ठंड को और तीखा बना दिया।

मौसम विभाग का संकेत है कि आने वाले एक सप्ताह तक सर्दी से राहत मिलने के आसार कम हैं। ठंडी पछुआ हवा लगातार 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। साथ ही न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है। सुबह के समय घना कोहरा छाने से दृश्यता प्रभावित हो सकती है, जिससे सामान्य जनजीवन के साथ-साथ परिवहन पर भी असर पड़ने की आशंका है।

बढ़ती ठंड को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। खासकर सुबह टहलने निकलने वाले लोगों को गर्म कपड़े पहनने और शरीर को पूरी तरह ढककर रखने की हिदायत दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में लापरवाही सर्दी-जुकाम से लेकर अन्य बीमारियों को न्योता दे सकती है।

ठंड का असर शहरों और कस्बों की रफ्तार पर भी दिखाई देने लगा है। सुबह और देर रात सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। दूसरी ओर बाजारों में गर्म कपड़ों, कंबलों, हीटर और गीजर की मांग बढ़ गई है। इस बदलते मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और खुले में काम करने वालों के लिए सतर्कता सबसे जरूरी मानी जा रही है।

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