बुधवार, नवम्बर 29, 2023

आर्यों का आक्रमण का सिद्धांत ब्रिटिश सरकार का साम्राज्यवादी षड्यंत्र था! – के0 के0 श्रीवास्तव

आर्यों का आक्रमण का सिद्धांत ब्रिटिश सरकार का साम्राज्यवादी षड्यंत्र था..! सबसे पहले 'आर्य जाति' जैसे शब्द का उल्लेख फ्रेंच लेखक आर्थर डे ने 1850 में किया…. जिसे उस वक्त के भारतीय पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष अंग्रेज कनिंघम ने ज्यों का त्यों अपना लिया।

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आर्यों का आक्रमण का सिद्धांत ब्रिटिश सरकार का साम्राज्यवादी षड्यंत्र था..! सबसे पहले ‘आर्य जाति’ जैसे शब्द का उल्लेख फ्रेंच लेखक आर्थर डे ने 1850 में किया…. जिसे उस वक्त के भारतीय पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष अंग्रेज कनिंघम ने ज्यों का त्यों अपना लिया।

वस्तुत: उसके पहले आर्य का जाति प्रयोग भारत के इतिहास, वेद, पुराण आदि में कहीं नही है….क्योंकि ‘आर्य’ जाति जैसी कोई चीज थी ही नही… ये शब्द सम्मान का सूचक था… अपने से बड़े श्रेष्ठ को आर्य कहा जाता था…. स्त्रियाँ अपने पति को ‘आर्य’ सम्मान में कहती थी….. आप रामायण, महाभारत, कालिदास के ग्रंथ, चाणक्य आदि को पढलें या वेद पुराण देख लें…. कहीं भी आर्य जाति के रूप मे आपको नही मिलेंगे। इसे जाति वर्ग में समाहित करना अंग्रेजों की कुटिल चाल थी…. जिसे बाद में जवाहर लाल नेहरू के छत्र छाया तले तथाकथित प्रबुद्ध इतिहासकारों ने इसे संपोषित किया।

असल में भारतवर्ष के उत्तरी हिस्से बलूचिस्तान, अफगान, पाकिस्तान, ईरान से सटे मकरान,, गुजरात,, राजस्थान,, हिमांचल, पंजाब, उत्तरप्रदेश आदि क्षेत्रों में निवास करने वालों को अंग्रेजों ने कुटिलता पूर्वक आर्य घोषित किया और दक्षिणी जनजातियों ( द्रविड़ आदि) को मूल निवासी।

इसके पीछे उनका उद्धेश्य ये था कि भारतीयों को दो वर्गों में बाटों और ये जस्टिफाई करो कि जैसे आर्य आक्रमण कारी थे और उनका शासन भारत में वैध हुआ,,,उसी तरह मुस्लिम आक्रमणकारी का शासन का भी वैध हुआ और अंग्रेजों का भी वैध है और उन्हे शासन करने का हक है।

दरअसल 1857 के बाद से ही अंग्रेजों को लग गया था कि भारत में शासन करने के लिए फुट डालो और शासन करो वाली बात करनी होगी,,, और अपने समर्थक पैदा करने होंगे। आर्य को जातिय स्वरूप देने और आक्रमणकारी घोषित करने के पीछे की मंशा सिर्फ ये थी कि… भारत के लोग ही खुद अपने देश के नही है और वो भी आक्रमणकारी है तो जब वो वैध है तो हम क्यों नहीं। उन्होंने बड़ी चतुराई से उत्तर भारतीयों को आर्य घोषित किया और द्रविड़ तथा अन्य जनजातियों को मूल निवासी। इसे बाद उनका अगला आघात हिंदूं मुस्लिम में विभेद पैदा करना था ।

(लेखक एक स्वतंत्र लेखक हैं। इस आलेख में सन्निहित विचार, तथ्य, आंकड़े लेखक के निजी हैं संपादक मण्डल का इनसे सहमत होना जरुरी नहीं- संपादक।)

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